जशपुर: बेटी को दिलाया सरकारी योजना का फायदा, लेकिन खुल गया बड़ा राज! आय छुपाने के आरोप में शिक्षक गिरफ्तार
75 हजार की आय बताकर कराया था मुफ्त प्रवेश, जांच में सामने आई लाखों की कमाई; कार्रवाई से शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

जशपुर। शासन की महत्वाकांक्षी शिक्षा योजना में कथित फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अपनी बेटी को सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए आय से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेराफेरी करने के आरोप में एक शासकीय शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। मामले के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे में चर्चा का माहौल है।
75 हजार की आय बताकर लिया योजना का लाभ
जानकारी के अनुसार, पत्थलगांव क्षेत्र में पदस्थ शासकीय शिक्षक चमर साय पैकरा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वास्तविक आय छुपाकर मात्र 75 हजार रुपये वार्षिक आय दर्शाते हुए आय प्रमाण पत्र बनवाया। इसके साथ ही कथित रूप से मिथ्या शपथ पत्र प्रस्तुत कर अपनी पुत्री को शैक्षणिक सत्र 2024-25 में कक्षा छठवीं में पंडित जवाहरलाल नेहरू उत्कर्ष योजना के तहत निःशुल्क प्रवेश दिलाया।
जांच में सामने आई लाखों की आय
मामले की जांच के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त वेतन अभिलेखों की पड़ताल की गई। जांच में शिक्षक की वास्तविक वार्षिक आय लगभग 6 लाख 79 हजार रुपये पाई गई। इसके अलावा आदिवासी विकास विभाग और अन्य दस्तावेजों से भी आय छुपाकर योजना का लाभ लेने के आरोपों की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
पात्र विद्यार्थियों के अधिकारों पर पड़ा असर
पुलिस के अनुसार, इस कथित कृत्य के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और वास्तव में पात्र प्रतिभावान विद्यार्थियों के अवसर प्रभावित हुए हैं। जिस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद छात्रों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है, उसमें गलत जानकारी देकर लाभ लेने का मामला गंभीर माना जा रहा है।
गिरफ्तार कर भेजा गया न्यायिक रिमांड पर
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया। इसके बाद 30 मई 2026 को आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
अब उठ रहे कई सवाल
इस कार्रवाई के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या इसी तरह के अन्य मामलों में भी पात्रता से जुड़ी जानकारी छुपाकर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया गया है। जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
फिलहाल आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।




