16 मार्च को ‘सत्ता संतुलन’ की जंग! राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव, बदलेगा संसद का गणित?
10 राज्यों में होगा मतदान, अप्रैल में खत्म हो रहा कई दिग्गजों का कार्यकाल; किस राज्य में कितनी सीटें खाली?

⚖️ ई दिल्ली। संसद की ताकत और सियासी संतुलन का नया टेस्ट अब 16 मार्च 2026 को होगा। चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इन सीटों पर काबिज़ सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, ऐसे में समय रहते चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
राजनीतिक हलकों में इसे बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन चुनावों के बाद राज्यसभा में दलों की ताकत का संतुलन बदल सकता है।
🗳️ चुनाव कार्यक्रम: कब क्या होगा?
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार:
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📅 26 फरवरी: अधिसूचना जारी
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📝 5 मार्च: नामांकन की अंतिम तिथि
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🔍 6 मार्च: नामांकन पत्रों की जांच
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↩️ 9 मार्च: नाम वापसी की अंतिम तिथि
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🗳️ 16 मार्च: सुबह 9 से शाम 4 बजे तक मतदान
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📊 16 मार्च शाम 5 बजे से मतगणना
आयोग ने साफ किया है कि चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र और पारदर्शी बनाने के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और सभी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन होगा।
🏛️ इन 10 राज्यों में होंगी सीटें
राज्यसभा चुनाव जिन राज्यों में होंगे, वे हैं:
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महाराष्ट्र
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ओडिशा
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तमिलनाडु
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पश्चिम बंगाल
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असम
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बिहार
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छत्तीसगढ़
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हरियाणा
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हिमाचल प्रदेश
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तेलंगाना
👥 इन दिग्गजों का खत्म हो रहा कार्यकाल
अप्रैल में जिन प्रमुख नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें कई बड़े नाम शामिल हैं:
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महाराष्ट्र से: प्रियंका चतुर्वेदी, शरद पवार, रामदास अठावले
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ओडिशा से: ममता मोहांता, मुजिबुल्ला खान, सुजीत कुमार, निरंजन बिशी
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तमिलनाडु से: एम थंबीदुरई, तिरुचि शिवा, कनिमोझी
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पश्चिम बंगाल से: साकेत गोखले, सुब्रत बख्शी
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असम से: रामेश्वर तेली
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बिहार से: अमरेंद्र सिंह धारी, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और राज्यसभा के उपसभापति हरीवंश नारायण सिंह
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छत्तीसगढ़ से: कवि तेजपाल सिंह, फूलो देवी नेताम
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हरियाणा से: किरण चौधरी
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हिमाचल प्रदेश से: इंदु बाला गोस्वामी
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तेलंगाना से: अभिषेक मनु सिंघवी, केआर सुरेश रेड्डी
🔎 क्यों अहम हैं ये चुनाव?
राज्यसभा में संख्या संतुलन सरकार के लिए बेहद मायने रखता है, खासकर तब जब बड़े विधेयकों को पारित कराना हो। 37 सीटों का यह चुनाव कई दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन सकता है।
सियासी जानकारों का मानना है कि इन नतीजों के बाद संसद के ऊपरी सदन में शक्ति संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। सभी दल संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन में जुट गए हैं।
अब नजर 16 मार्च पर है—जब तय होगा कि राज्यसभा में किसकी ताकत बढ़ेगी और किसकी घटेगी।


