मंच पर उतरी मणिपुर की नृत्य परंपरा, भाव-भंगिमाओं ने बांधा ऐसा समां कि तालियों से गूंज उठा पूरा समारोह
41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या में डॉ. मंजू ईलांग्बाम की मणिपुरी नृत्य प्रस्तुति ने जीता दर्शकों का दिल, लय और भाव-अभिनय का दिखा मनोहारी संगम

रायपुर, 19 सितंबर 2026। 41वें चक्रधर समारोह-2026 की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति से यादगार बन गई। प्रतिष्ठित मणिपुरी नृत्यांगना डॉ. मंजू ईलांग्बाम ने अपनी भावपूर्ण और लयबद्ध प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंच पर उनकी सहज पदचाल, नयनाभिनय, भाव-भंगिमाओं और लयकारी ने मणिपुरी नृत्य की शास्त्रीय गरिमा और कोमलता को जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान कलाकार की नृत्याभिव्यक्ति में भाव और लय का ऐसा सुंदर तालमेल देखने को मिला कि दर्शक लगातार प्रस्तुति से जुड़े रहे।
शास्त्रीय गरिमा और कोमलता का दिखा संगम
डॉ. मंजू ईलांग्बाम ने मणिपुरी नृत्य की पारंपरिक शैली को अपनी प्रभावशाली नृत्याभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया। उनकी सहज पदचाल और भावपूर्ण भंगिमाओं में मणिपुरी नृत्य की विशिष्ट पहचान स्पष्ट दिखाई दी।
प्रस्तुति के दौरान नृत्य की लय और भाव-अभिनय का सुंदर समन्वय दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
स्वर्ण पदक के साथ हासिल की पीएच.डी.
डॉ. मंजू ईलांग्बाम मणिपुरी शास्त्रीय नृत्यांगना के साथ-साथ कोरियोग्राफर और शोधकर्ता भी हैं। उन्होंने विश्व-भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन से मणिपुरी नृत्य में स्वर्ण पदक के साथ पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की है।
उन्हें संगीत नाटक अकादमी उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार और मणिपुर राज्य कला अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
कलाकारों की संगत ने प्रस्तुति में भरे सुर और लय
इस प्रस्तुति को प्रभावी बनाने में संगत कलाकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इरोम रॉबर्ट सिंह ने तालवाद्य, मायोंगबाम प्रियानी देवी ने गायन एवं संगीत तथा लाइमायुम नेल्सन शर्मा ने सितार वादन से संगत दी।
कलाकारों की सधी हुई संगत ने नृत्य की लय और भावों को और प्रभावशाली बनाया। मणिपुरी नृत्य, संगीत और ताल के इस सुंदर मेल ने चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।



