छत्तीसगढ़

एक महीने पहले ही नक्सलमुक्त हुआ इलाका… अब 73 लाख के इनामी 15 माओवादी सरेंडर!

9 महिला-6 पुरुष ने हथियार छोड़े, शीर्ष पुलिस अफसरों के सामने लिया संविधान और तिरंगे का संकल्प

महासमुंद। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से सटे बड़े इलाके से नक्सल मोर्चे पर ऐतिहासिक खबर सामने आई है। एक महीने पहले जिस क्षेत्र को नक्सलमुक्त घोषित किया गया था, वहीं अब 73 लाख रुपये के इनामी 15 सशस्त्र माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर सबको चौंका दिया है।

“पूना मारगेम–पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत बीबीएम डिवीजन के इन नक्सलियों ने अपने अत्याधुनिक हथियारों के साथ शीर्ष पुलिस अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया। इस दौरान एडीजी नक्सल, आईजी रायपुर, आईजी संबलपुर सहित वरिष्ठ अफसर मौजूद रहे।

9 महिला और 6 पुरुष ने छोड़ी बंदूक

आत्मसमर्पण करने वालों में 9 महिला और 6 पुरुष नक्सली शामिल हैं। ये सभी शासन द्वारा प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की ओडिशा स्टेट कमेटी के पश्चिमी सब-जोन के बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिविजनल कमेटी से जुड़े थे।

इन 15 माओवादियों पर कुल 73 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें 1 स्टेट कमेटी सदस्य पर 25 लाख, 2 डिविजनल कमेटी सदस्यों पर 8-8 लाख, 5 एरिया कमेटी सदस्यों पर 5-5 लाख और 7 प्लाटून सदस्यों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम शामिल था।

हथियार छोड़ तिरंगा थामा

आत्मसमर्पण के दौरान सभी ने हथियार त्यागकर संविधान और तिरंगा झंडा थामने की बात कही। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे अभियान और विकास कार्यों के चलते माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहा है और अब सदस्य मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और विकास की दिशा में यह अहम कदम है। प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में और भी नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं।

इस घटनाक्रम ने साफ संकेत दिया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की रणनीति और पुनर्वास नीति असर दिखा रही है।

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