छत्तीसगढ़

Paneer Factory Raid: पनीर समझकर खा रहे थे कुछ और! जांच में निकला प्रतिबंधित एनालॉग पनीर, फैक्ट्री सील… 300 किलो माल JCB से दफन

महासमुंद की फैक्ट्री में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई; रायपुर और ओडिशा तक हो रही थी सप्लाई, लैब रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन ने नष्ट कराया पूरा स्टॉक

 

महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नकली पनीर को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। वैद्य फूड प्रोडक्ट्स के प्लांट से जब्त करीब 300 किलो पनीर जांच में अमानक और प्रतिबंधित एनालॉग पनीर पाया गया। लैब रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने पूरा स्टॉक नष्ट करा दिया और फैक्ट्री की प्रोडक्शन यूनिट को सील कर दिया।

बताया जा रहा है कि इस प्लांट में तैयार पनीर की सप्लाई रायपुर समेत ओडिशा के कई इलाकों तक की जा रही थी। मामले में फैक्ट्री संचालक शोभित सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

शिकायत के बाद फैक्ट्री में पड़ा छापा

मामला जिले के भालेसर क्षेत्र में संचालित वैद्य फूड प्रोडक्ट्स प्लांट का है। फैक्ट्री के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद खाद्य विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने 17 अगस्त की देर रात प्लांट में दबिश दी थी।

करीब तीन एकड़ क्षेत्र में संचालित इस फैक्ट्री में उस समय करीब 10 से 12 कारीगर काम कर रहे थे। ये सभी मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

छापेमारी के दौरान टीम को बड़ी मात्रा में तैयार पनीर मिला, जिसकी गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को संदेह हुआ।

300 किलो पनीर जब्त, सैंपल भेजा गया लैब

अधिकारियों ने करीब 300 किलो तैयार पनीर जब्त कर लिया। इसके बाद पनीर का सैंपल जांच के लिए रायपुर की लैब भेजा गया।

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। लैब रिपोर्ट में सैंपल को अमानक और एनालॉग पनीर पाया गया। प्रशासन के मुताबिक यह प्रतिबंधित श्रेणी का उत्पाद था।

रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों ने पूरे जब्त स्टॉक को नष्ट करने का फैसला लिया।

JCB से गड्ढा खोदकर दफन किया 300 किलो पनीर

गुरुवार शाम खाद्य विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम दोबारा फैक्ट्री पहुंची। टीम की मौजूदगी में JCB से गड्ढा खुदवाया गया और करीब 300 किलो नकली पनीर को उसमें दफना कर नष्ट कर दिया गया।

इसके बाद फैक्ट्री की प्रोडक्शन यूनिट को सील कर दिया गया।

एक साल से चल रहा था प्लांट

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भालेसर में यह फैक्ट्री करीब एक साल से संचालित हो रही थी। अधिकारियों की जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि यहां तैयार होने वाला पनीर किन-किन जगहों पर भेजा जाता था और अब तक कितनी मात्रा में इसकी सप्लाई की जा चुकी है।

बताया गया है कि फैक्ट्री से तैयार पनीर रायपुर और ओडिशा तक भेजा जा रहा था।

पूरे छत्तीसगढ़ में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर अभियान

छत्तीसगढ़ में नकली पनीर और मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ 17 अगस्त से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 23 अगस्त तक जारी रहेगा।

इस दौरान खाद्य विभाग की टीमें अलग-अलग जिलों में दुकानों, होटलों और फैक्ट्रियों की जांच कर रही हैं। खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जा रहे हैं और जांच में मिलावट या मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

संचालक के खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई

फैक्ट्री कानपुर निवासी शोभित सिंह की बताई जा रही है। प्रशासन ने कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

फिलहाल विभाग की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाली सामग्री कहां से आती थी और तैयार उत्पाद की सप्लाई का नेटवर्क कितना बड़ा था।

पनीर की जगह क्या खिला रहे थे लोगों को?

लैब रिपोर्ट में पनीर का सैंपल अमानक और प्रतिबंधित एनालॉग पनीर पाए जाने के बाद प्रशासन की कार्रवाई ने इस पूरे कारोबार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक साल से चल रही इस फैक्ट्री से अब तक कितनी मात्रा में ऐसा पनीर बाजार में पहुंच चुका है और इसे खाने वाले लोगों की सेहत पर इसका क्या असर पड़ा? जांच आगे बढ़ने के साथ इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।

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