छत्तीसगढ़ कांग्रेस में ‘राज्यसभा संग्राम’! अमरजीत भगत हाईकमान के दरबार में… अब किसकी कटेगी पर्ची?
सरगुजा के नाम पर सियासी दबाव, अजय चंद्राकर का पलटवार— “पहले बताओ क्षेत्रीय संतुलन होता क्या है?”

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में ‘राज्यसभा संग्राम’! अमरजीत भगत हाईकमान के दरबार में… अब किसकी कटेगी पर्ची?
👉 सरगुजा के नाम पर सियासी दबाव, अजय चंद्राकर का पलटवार— “पहले बताओ क्षेत्रीय संतुलन होता क्या है?”
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में राज्यसभा सीट को लेकर अचानक सियासी पारा चढ़ गया है। अंदरखाने चल रही खींचतान अब खुले मंच पर आ गई है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने सीधे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हाईकमान से गुहार लगाई है कि राज्यसभा उम्मीदवार तय करते समय “क्षेत्रीय संतुलन” का खास ध्यान रखा जाए।
भगत के इस कदम को राजनीतिक हलकों में बड़ा संकेत माना जा रहा है—क्या यह टिकट की दावेदारी है या संगठन पर दबाव बनाने की रणनीति?
सरगुजा का मुद्दा बना ‘सियासी हथियार’
अमरजीत भगत ने साफ कहा कि सरगुजा संभाग से फिलहाल लोकसभा, विधानसभा और नगरीय निकायों में कांग्रेस का कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। उनका तर्क है कि सरगुजा लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वहां से कोई निर्वाचित चेहरा नहीं होने से कार्यकर्ताओं में निराशा है।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि इस बार भी सरगुजा को नजरअंदाज किया गया, तो संगठनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है। राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और पार्टी को मजबूती मिलेगी।
अजय चंद्राकर का करारा पलटवार
भगत के बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया— “पहले कांग्रेस ये बताए कि क्षेत्रीय संतुलन की परिभाषा क्या है?”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब केटीएस तुलसी, रंजीता रंजन और राजीव शुक्ला को राज्यसभा भेजा गया, तब कौन सा क्षेत्रीय संतुलन देखा गया था?
चंद्राकर ने आगे कहा कि अगर छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेताओं की ही चलती, तब शायद वे अपने पसंदीदा चेहरों को राज्यसभा भेज पाते। उन्होंने यह भी सवाल उछाला कि चरणदास महंत और दीपक बैज क्या छत्तीसगढ़ के बाहर के नेता हैं?
“सरगुजा महाराज के चरणों में सरेंडर?” बयान से बढ़ी हलचल
अजय चंद्राकर ने बयान देते हुए यहां तक कह दिया कि अमरजीत को सरगुजा महाराज के चरणों में “सरेंडर” हो जाना चाहिए। इस टिप्पणी ने सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।
अब सवाल यही है—क्या राज्यसभा टिकट पर अंतिम फैसला हाईकमान की बंद कमरे की बैठक में होगा, या सरगुजा बनाम बाकी छत्तीसगढ़ की जंग और तेज होगी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर की यह ‘ठंडी जंग’ खुली बगावत में भी बदल सकती है। फिलहाल, सबकी निगाहें दिल्ली दरबार पर टिकी हैं… क्योंकि राज्यसभा की एक सीट कई दावेदारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करने वाली है।

