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संसद में ‘चढ़ावा चोरी’ का ड्रामा पड़ा भारी! पप्पू यादव पर FIR की बौछार, सनातन के अपमान के आरोपों से मचा सियासी तूफान

भगवा वेश में विरोध प्रदर्शन बना विवाद की वजह, दिल्ली-लखनऊ समेत कई जगह शिकायतें दर्ज; लोकसभा सचिवालय भी हुआ सख्त

New Delhi: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर संसद परिसर में किए गए प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन ने अब बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के खिलाफ दिल्ली, लखनऊ समेत कई स्थानों पर शिकायतें और FIR दर्ज कराई गई हैं। शिकायतकर्ताओं ने उन पर सनातन धर्म का अपमान और हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

31 जुलाई को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर एक सांकेतिक नुक्कड़ नाटक किया। इस दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर साधु के वेश में नजर आए।

प्रदर्शन में एक दानपेटी और भगवान राम की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। विपक्षी सांसदों ने प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी में पैसे डाले, जबकि नाटक के हिस्से के रूप में पप्पू यादव ने उन पैसों को अपनी जेब में रखा और बाद में दानपेटी लेकर भागते हुए दिखे। इस प्रदर्शन का उद्देश्य, विपक्ष के अनुसार, चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को उजागर करना था।

हालांकि प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कई संगठनों ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताया।

दिल्ली समेत कई जगह दर्ज हुई FIR

घटना के बाद दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने सहित कई स्थानों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं। शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन से सनातन धर्म और हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

इसके अलावा विभिन्न शहरों में भी विरोध प्रदर्शन किए गए और कई संगठनों ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

सपा ने किया बचाव

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस विरोध प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी धर्म का अपमान करना नहीं था, बल्कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान से जुड़े कथित आरोपों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।

उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर संसद में चर्चा चाहता है और यह पूरी तरह एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन था।

लोकसभा सचिवालय और स्पीकर का सख्त रुख

इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा सचिवालय और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में विरोध-प्रदर्शन के तौर-तरीकों को लेकर सख्ती दिखाई है।

सचिवालय ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में संसद परिसर में वेशभूषा बदलकर प्रदर्शन, नाटकीय मंचन या इसी तरह की प्रतीकात्मक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों

पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज शिकायतों के बाद मामला अब जांच और कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। वहीं विपक्ष इस प्रदर्शन को लोकतांत्रिक विरोध और सांकेतिक अभिव्यक्ति बता रहा है, जबकि शिकायतकर्ता इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं।

अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर

FIR दर्ज होने और संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के नियमों को लेकर सख्ती के बाद यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कार्रवाई करती हैं और संसद में इस विवाद की गूंज कितनी दूर तक जाती है।

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