छत्तीसगढ़

रायगढ़/कोरिया: रेत की खदान से उठी चिंगारी बनी मौत की आग! भाजपा नेता को कार समेत जिंदा जलाने का आरोप, छत्तीसगढ़ में मचा सियासी भूचाल

भाजपा के दो प्रभावशाली परिवारों की रंजिश पहुंची खूनी अंजाम तक, फॉर्च्यूनर को टक्कर मारकर आग के हवाले करने का आरोप; कई घायल, प्रदेश में अवैध रेत कारोबार पर फिर उठे सवाल

 

रायगढ़/कोरिया। छत्तीसगढ़ में अवैध रेत कारोबार को लेकर चल रही खींचतान अब खौफनाक और खूनी मोड़ पर पहुंच गई है। कोरिया जिले के नागोई गांव में हुई एक सनसनीखेज घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। भाजपा से जुड़े दो प्रभावशाली परिवारों के बीच रेत उत्खनन को लेकर चला विवाद ऐसा भड़का कि एक भाजपा नेता की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के पूर्व जनपद अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ ललन सिंह की फॉर्च्यूनर वाहन में आग लगने से मौत हो गई। घटना के समय वाहन में सवार अन्य लोग भी बुरी तरह झुलस गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में नागेंद्र सिंह, वीरू, योगेंद्र और मयंक शामिल बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि रेत खदान के संचालन और अवैध उत्खनन को लेकर ठाकुर परिवार और त्रिपाठी परिवार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि मंगलवार रात दोनों पक्षों के बीच पहले फोन पर तीखी बहस हुई, जिसके बाद भरत सिंह अपने साथियों के साथ फॉर्च्यूनर वाहन में सवार होकर नागोई गांव पहुंचे। यहां पहले से मौजूद दूसरे पक्ष के लोगों के साथ विवाद हिंसक रूप ले बैठा।

घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि फॉर्च्यूनर वाहन को पहले एक टिपर से टक्कर मारी गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग बाहर नहीं निकल सके। इसके बाद वाहन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पुलिस के अनुसार मामले में त्रिपाठी परिवार के नौ लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है। इनमें मनोज त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी, अमन त्रिपाठी, अक्षय त्रिपाठी, सत्य कुमार त्रिपाठी, गौरव त्रिपाठी, आशुतोष त्रिपाठी, नरेंद्र त्रिपाठी और महेंद्र त्रिपाठी के नाम शामिल हैं। अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

घटना की जांच कर रही पुलिस और फॉरेंसिक टीम आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में वाहन के बिजली के खंभे से टकराने की बात सामने आई है। शॉर्ट सर्किट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वाहन में आग लगाई गई थी या किसी अन्य कारण से आग भड़की।

इस घटना ने प्रदेश में अवैध रेत कारोबार और उससे जुड़े नेटवर्क पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खदानों की नीलामी और पर्यावरणीय स्वीकृतियों में देरी के बीच कई क्षेत्रों में अवैध उत्खनन का कारोबार तेजी से फैल रहा है। सीमित संसाधनों और कम अमले के कारण प्रशासन की कार्रवाई भी पर्याप्त प्रभावी नहीं दिख रही है।

नागोई की यह घटना अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रदेश में अवैध खनन के बढ़ते प्रभाव, राजनीतिक संरक्षण और कानून-व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल बनकर उभरी है। पूरे प्रदेश की नजर अब पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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