छत्तीसगढ़

“निडर बनो, तभी बनोगे लीडर…” रायपुर में छात्रों से संवाद के दौरान पीएम मोदी का ऐसा संदेश, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया

‘परीक्षा पे चर्चा’ में पीएम मोदी ने तनाव, नेतृत्व, खेल, पढ़ाई और जिंदगी को लेकर छात्रों से दिल से की बात

“निडर बनो, तभी बनोगे लीडर…” रायपुर में छात्रों से संवाद के दौरान पीएम मोदी का ऐसा संदेश, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया

रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में उस वक्त माहौल खास बन गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे छात्रों से रूबरू हुए। ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में पीएम मोदी ने न सिर्फ परीक्षा के तनाव पर बात की, बल्कि जीवन, नेतृत्व और आत्मविश्वास को लेकर ऐसी बातें कहीं, जो हर छात्र के दिल को छू गईं।

कार्यक्रम की शुरुआत पीएम मोदी के पारंपरिक अभिवादन “जय जोहार” से हुई, जिस पर बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ जवाब दिया। माहौल तभी और सहज हो गया, जब स्थानीय बच्चों ने पीएम मोदी को खुरमी खिलाई। पीएम ने न सिर्फ उसे चखा, बल्कि अपने हाथों से बच्चों को भी बांटा—यह पल बच्चों के लिए यादगार बन गया।

“लीडर बनना है तो पहले निडर बनो”

संवाद के दौरान पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर जीवन में ऊंचाइयों को छूना है या लीडर बनना है, तो सबसे पहले डर से बाहर निकलना होगा।
उन्होंने कहा,

“कोई करे या न करे, मैं करूंगा—जब यह सोच आ जाती है, तभी नेतृत्व अपने-आप विकसित होता है।”

पीएम मोदी ने यह भी समझाया कि लीडरशिप का मतलब सिर्फ भाषण देना या चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि लोगों को समझना और साथ लेकर चलना है।

परीक्षा का डर कैसे खत्म करें? पीएम ने दिया आसान मंत्र

एक छात्रा ने परीक्षा के दौरान घबराहट को लेकर सवाल किया। इस पर पीएम मोदी ने बच्चों को भरोसा रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो भी पढ़ा है, वह कहीं न कहीं मन में जमा रहता है।
उन्होंने पढ़ाई की तुलना खेल से करते हुए कहा कि जैसे खिलाड़ी अभ्यास और हार-जीत से मजबूत बनता है, वैसे ही छात्र भी निरंतर अभ्यास से आत्मविश्वासी बनता है।

कमजोर विषय का डर? दोस्त बनाकर पढ़ाओ!

पीएम मोदी ने एक खास तरीका भी बताया—
अगर किसी विषय में कमजोरी है, तो उस विषय में कमजोर छात्र को दोस्त बनाकर उसे पढ़ाना शुरू करो। पढ़ाते-पढ़ाते खुद की पकड़ मजबूत हो जाएगी।

घूमना है? तो दूर नहीं, पास से शुरुआत करो

एक छात्र ने परीक्षा के बाद घूमने को लेकर सवाल किया। पीएम मोदी ने कहा कि पर्यटन की शुरुआत पहले अपनी तहसील, जिले और राज्य से करनी चाहिए।
उन्होंने छात्रों को साधारण यात्रा करने की सलाह दी—ट्रेन से सफर, घर का खाना और आम लोगों के बीच रहकर अनुभव लेना ही असली सीख देता है।

खेल और पढ़ाई दोनों जरूरी

खेल और पढ़ाई के संतुलन पर पीएम मोदी ने साफ चेतावनी दी कि यह सोच गलत है कि पढ़ाई काफी है तो खेल की जरूरत नहीं या खेल में अच्छे हैं तो पढ़ाई छोड़ दें।
उनका कहना था कि खेल जीवन में अनुशासन और संतुलन सिखाता है।

पर्यावरण बचाने के छोटे कदम, बड़ा असर

पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए पीएम मोदी ने छोटे-छोटे उदाहरण दिए—ब्रश करते वक्त पानी बंद करना, बचे पानी को पौधों में डालना।
उन्होंने एक स्कूल का उदाहरण बताया, जहां बच्चों के छोटे प्रयासों से पूरा परिसर हराभरा हो गया।

छात्रों के दिल को छू गया संवाद

कार्यक्रम के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ सिर्फ बोर्ड परीक्षा नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू से जुड़ी बातों का मंच है।
संवाद के बाद छात्रों ने खुशी जाहिर की और कहा कि प्रधानमंत्री से इस तरह सीधे बातचीत करना उनके लिए सपने जैसा अनुभव रहा।

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