छत्तीसगढ़

परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी का मंत्र: “तनाव छोड़ो, सांस भरो… यहीं से बदलेगा रिजल्ट!”

डाइट से लेकर जुनून तक, छात्रों को मिले सफलता और सुकून के सीक्रेट

दिल्ली।
परीक्षा के दबाव से जूझ रहे लाखों छात्रों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ऐसा संदेश दिया, जिसने दिल भी छुआ और डर भी दूर किया। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण के दूसरे एपिसोड में पीएम मोदी ने छात्रों से खुलकर संवाद करते हुए तनाव, पढ़ाई और जीवन संतुलन का असली फॉर्मूला साझा किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने गुवाहाटी के छात्रों से बातचीत की और बताया कि परीक्षा सिर्फ नंबरों की लड़ाई नहीं, बल्कि खुद को समझने का मौका है।

PM मोदी बोले – मेरी डाइट का कोई सिस्टम नहीं

एक छात्र के सवाल पर पीएम मोदी ने मुस्कराते हुए कहा कि उनकी डाइट का कोई तय सिस्टम कभी नहीं रहा।
उन्होंने बताया कि लगातार यात्राओं के चलते जो उपलब्ध होता, वही खा लेते थे। कई बार खुद खाना बनाना पड़ा और खिचड़ी तक पकानी पड़ी।

उन्होंने छात्रों को सरल लेकिन असरदार सलाह दी—
👉 “इतनी गहरी सांस लो कि शरीर भर जाए।”
👉 “सुबह सूर्योदय देखना आदत बना लो, शरीर खुद तरोताजा रहेगा।”

पीएम मोदी ने कहा कि अक्सर लोग शरीर को सबसे आखिरी प्राथमिकता देते हैं, जबकि असली ताकत वहीं से आती है।

पढ़ाई बनाम जुनून नहीं, दोनों साथ-साथ

प्रधानमंत्री ने छात्रों को समझाया कि पढ़ाई और रचनात्मकता को एक-दूसरे का विरोधी न समझें।
उन्होंने कहा कि कला, संगीत और शौक अकादमिक दबाव से निकलने का रास्ता बनते हैं और दिमाग को तरोताजा रखते हैं।

वोकल फॉर लोकल से लेकर वेड इन इंडिया तक

पीएम मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ का जिक्र करते हुए कहा कि देश में बने उत्पादों को अपनाने से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
उन्होंने ‘वेड इन इंडिया’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें विदेश के बजाय भारत में ही शादियां करने को बढ़ावा दिया गया है।

छोटी शुरुआत, बड़े सपने

छात्रों को उद्यमिता के लिए प्रेरित करते हुए पीएम मोदी ने कहा—
👉 “बड़े आइडिया हमेशा छोटी शुरुआत से ही जन्म लेते हैं।”
उन्होंने स्टार्ट-अप शुरू करने, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स से जुड़ने और किताबों से बाहर निकलकर प्रैक्टिकल अनुभव लेने की सलाह दी।

2047 का सपना, आज के छोटे कदम

प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों द्वारा उठाया गया हर छोटा कदम 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देता है।

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