छत्तीसगढ़

Sukma News: कभी जंगल के साए में थी जिंदगी, अब रैंप पर दिखा आत्मविश्वास! 9 पुनर्वासित महिलाओं ने किया फैशन शो में वॉक

Raipur/Sukma News: छत्तीसगढ़ के सुकमा की 9 पुनर्वासित महिलाओं ने समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपनी नई कहानी लिखी है। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के मौके पर रायपुर में आयोजित स्वदेशी फैशन शो में इन महिलाओं ने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से हिस्सा लिया और कोसा व कॉटन के परिधान पहनकर रैंप वॉक किया।

इन महिलाओं की भागीदारी को उनके आत्मविश्वास, सामाजिक जुड़ाव और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

9 महिलाओं ने अपनी इच्छा से किया रैंप वॉक

राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो और ग्रामोद्योग हाथकरघा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।

इस कार्यक्रम में सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्रों में रह रही 9 महिलाओं ने हिस्सा लिया। महिलाओं ने बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम के कोसा और कॉटन से तैयार परिधान पहनकर रैंप वॉक किया।

खास बात यह रही कि सभी महिलाओं ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपनी लिखित सहमति दी थी।

विभाग ने कहा- किसी तरह का दबाव नहीं था

ग्रामोद्योग विभाग ने स्पष्ट किया कि इन महिलाओं की भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक थी। विभाग के मुताबिक, सुकमा जिला प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 को महिलाओं की सहभागिता की जानकारी दी थी और चयनित सभी 9 महिलाओं ने लिखित रूप से अपनी सहमति दी थी।

महिलाओं ने बिना किसी दबाव के फैशन शो में हिस्सा लिया। विभाग का कहना है कि इस पहल से पुनर्वासित महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली है।

हाथकरघा से रोजगार की नई राह

इस आयोजन का उद्देश्य केवल फैशन शो तक सीमित नहीं था। इसके जरिए छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हाथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने और बुनकरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर भी जोर दिया गया।

महिलाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि पुनर्वास के बाद उन्हें सिर्फ सामाजिक स्वीकार्यता ही नहीं, बल्कि रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

160 हितग्राहियों को मिलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण

महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अब बस्तर संभाग के 8 पुनर्वास केंद्रों के 160 हितग्राहियों को हाथकरघा वस्त्र बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

हर पुनर्वास केंद्र से 20 हितग्राहियों का चयन किया जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से 54.40 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

प्रशिक्षण लेने वाले हितग्राहियों को निःशुल्क नए करघे और जरूरी उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य उन्हें घर से ही काम करने और आय अर्जित करने का अवसर देना है।

स्थायी पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर जोर

ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा कि पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए बेहद जरूरी है।

इस पहल के जरिए सरकार का फोकस पुनर्वासित लोगों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने पर है।

रैंप पर इन 9 महिलाओं की मौजूदगी सिर्फ एक फैशन शो का हिस्सा नहीं थी, बल्कि बदलती जिंदगी और नए आत्मविश्वास की तस्वीर भी बनी।

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