छत्तीसगढ़

पानी के लिए जंग… 10 दिन में बदली 15 जिलों की तस्वीर, ‘Water 4 Life’ बना जनआंदोलन—क्या ये मुहिम बचा पाएगी भविष्य?

रिलायंस फाउंडेशन के अभियान में हजारों लोगों की भागीदारी, नदियों-तालाबों से निकला टनों कचरा—देशभर में बढ़ती जागरूकता ने दिया बड़ा संकेत


मुंबई: पानी को बचाने की जंग अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। रिलायंस फाउंडेशन द्वारा विश्व जल दिवस 2026 के मौके पर शुरू किया गया ‘Water 4 Life’ अभियान अब देशभर में तेजी से फैलता नजर आ रहा है।

महज 10 दिनों के भीतर ही इस अभियान ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 15 जिलों में बड़ा असर दिखाया है। सैकड़ों स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर 153 से अधिक जल स्रोतों की सफाई की, जिसमें नदियों के घाट, तालाब और अन्य जलाशय शामिल रहे।

इस पहल के तहत मध्यप्रदेश के 11 जिलों के 144 से अधिक कस्बों और छत्तीसगढ़ के 4 जिलों के 9 गांवों में व्यापक स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान सैकड़ों किलो कचरा हटाकर जल स्रोतों को फिर से जीवंत करने की कोशिश की गई। खास बात यह रही कि नर्मदा नदी के घाटों समेत कई प्रमुख स्थानों पर स्थानीय किसान, महिलाएं, युवा और रिलायंस के कर्मचारियों ने मिलकर श्रमदान किया।

यह अभियान केवल इन दो राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशव्यापी स्तर पर भी इसे जबरदस्त समर्थन मिला। 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 108 जिलों में 33,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इस दौरान 912 गांवों और कस्बों से करीब 85,000 किलो कचरा हटाया गया, जिससे नदियों, झीलों और तटीय क्षेत्रों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया।

अभियान के अंतर्गत कोच्चि बीच और रंकाला झील जैसे प्रमुख स्थलों पर भी सफाई अभियान चलाया गया, जिसने इस मुहिम को और व्यापक बना दिया।

‘Water 4 Life’ पहल, रिलायंस फाउंडेशन के ग्रामीण परिवर्तन कार्यक्रम का विस्तार है, जिसके तहत अब तक 2,000 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक जल संचयन किया जा चुका है। साथ ही, 2,500 प्रशिक्षित ‘विलेज क्लाइमेट चैंपियंस’ इस अभियान को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ा रहे हैं, जो जल साक्षरता और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

यह पहल अब केवल एक सफाई अभियान नहीं रह गई है, बल्कि देश के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बन चुकी है। सवाल अब यह है—क्या यह जनआंदोलन वक्त रहते पानी के संकट को टाल पाएगा, या फिर यह सिर्फ एक चेतावनी बनकर रह जाएगा?

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