जंगल में लौटी ‘काली छलांगों’ की गूंज… बारनवापारा में विलुप्त काले हिरणों की वापसी, अब फिर दौड़ता दिख रहा जंगल का राज
200 से अधिक ब्लैकबक का बसेरा बना अभयारण्य, पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि की खुलकर सराहना की

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य आज संरक्षण की एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसे देशभर में सराहा जा रहा है। कभी जहां से काले हिरण (ब्लैकबक) लगभग विलुप्त हो गए थे, वहीं अब यही क्षेत्र फिर से उनकी छलांगों और उपस्थिति से जीवंत हो उठा है।
करीब 245 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य में अब लगभग 200 काले हिरणों का सफल पुनर्वास हो चुका है। यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत, वैज्ञानिक संरक्षण और वन विभाग की सतत निगरानी का परिणाम मानी जा रही है।
1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण ब्लैकबक इस क्षेत्र से लगभग गायब हो गए थे। करीब पांच दशकों तक यह प्रजाति स्थानीय स्तर पर विलुप्त मानी जाती रही। लेकिन वर्ष 2018 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में इनके पुनरुद्धार की योजना को मंजूरी मिलने के बाद स्थिति बदलने लगी।
योजनाबद्ध तरीके से काले हिरणों को बारनवापारा में पुनः बसाया गया और धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती चली गई। आज हालात यह हैं कि खुले मैदानों में उनकी दौड़ और झुंड फिर से दिखाई देने लगे हैं।
इस उपलब्धि का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें संस्करण में किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह खोई हुई प्राकृतिक विरासत की वापसी का उदाहरण है, जो देश के लिए प्रेरणादायक है।
बारनवापारा अभयारण्य की यह सफलता न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सही योजना और निरंतर प्रयासों से प्रकृति के संतुलन को फिर से बहाल किया जा सकता है।

