शराब घोटाले का किंगपिन नहीं निकल पाया कानून के शिकंजे से! सुप्रीम कोर्ट से अनवर ढेबर को बड़ा झटका
2161 करोड़ के घोटाले में फंसे अनवर की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, 22 आबकारी अधिकारी पहले ही सस्पेंड—ED की चार्जशीट ने खोले कई बड़े राज़

रायपुर, 14 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल शराब घोटाले में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को देश की सर्वोच्च अदालत से करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अनवर की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे यह साफ हो गया कि कानून का शिकंजा अभी ढीला नहीं पड़ा है।
यह मामला महज़ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सत्ता, सिस्टम और संगठित भ्रष्टाचार का गहरा खेल है। शराब घोटाले में 22 आबकारी अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जिन पर आरोप है कि वे इस घोटाले के सिंडिकेट का हिस्सा थे और उन्होंने करीब 88 करोड़ की अवैध कमाई की थी।
क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?
घोटाले की जड़ें साल 2017 में आबकारी नीति में संशोधन से जुड़ी हैं, जब CSMCL के ज़रिए शराब बिक्री का प्रावधान किया गया। लेकिन 2019 के बाद अनवर ढेबर, जो कि रायपुर महापौर एजाज ढेबर के भाई हैं, ने कथित रूप से इस सिस्टम को भ्रष्टाचार का जरिया बना लिया।
ED की जांच और चार्जशीट के मुताबिक, अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का एमडी बनवाया गया और इसके बाद अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रसूखदारों का सिंडिकेट बनाया गया, जिसने मिलकर करीब 2161 करोड़ रुपये का घोटाला किया।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि छत्तीसगढ़ में अवैध वसूली और दलाली का संगठित खेल चल रहा है। इसके बाद ED ने 18 नवंबर 2022 को PMLA के तहत केस दर्ज किया।
कौन-कौन हैं आरोपी?
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अनवर ढेबर
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पूर्व IAS अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा
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CM सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया
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पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा (जेल में बंद)
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त्रिलोक सिंह ढिल्लन, छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, ओम सांई ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, भाटिया वाइन मर्चेंट, नेस्ट जेन पावर, सिद्धार्थ सिंघानिया सहित अन्य
13 मार्च को ED ने 3,841 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 21 अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं। यह केस अब छत्तीसगढ़ की सियासत और अफसरशाही की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।


