भारत में वही ब्रांड, फिर भी स्वाद और क्वालिटी में इतना फर्क क्यों? Fanta से Maggi तक विदेश वाला प्रोडक्ट देख आप भी चौंक जाएंगे!

नई दिल्ली: बाजार में किसी बड़े इंटरनेशनल ब्रांड का नाम देखकर अक्सर उपभोक्ता मान लेते हैं कि दुनिया के हर देश में उसका प्रोडक्ट लगभग एक जैसा ही होगा। लेकिन हकीकत कुछ अलग हो सकती है। एक ही ब्रांड के अलग-अलग देशों में बिकने वाले प्रोडक्ट की रेसिपी, सामग्री, पोषण प्रोफाइल और लेबलिंग में अंतर देखने को मिल सकता है।
Fanta, KitKat और Maggi जैसे लोकप्रिय प्रोडक्ट इसके उदाहरण के तौर पर अक्सर चर्चा में रहते हैं। कहीं चीनी की मात्रा अलग है, कहीं इस्तेमाल होने वाला तेल बदल जाता है और कहीं पैकेट के सामने ही पोषण संबंधी चेतावनी दिखाई देती है, जबकि भारत में ऐसी जानकारी मुख्य रूप से पैकेट के पीछे दी जाती है।
यही अंतर भारत में फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन चेतावनी लेबल की मांग को भी लगातार चर्चा में रखता है।
Fanta में भी अलग-अलग देशों का अलग फॉर्मूला?
ब्रिटेन में बिकने वाली Fanta और भारत में उपलब्ध Fanta के पोषण प्रोफाइल में अंतर होने की बात कही जाती है। भारतीय वर्जन में चीनी की मात्रा अधिक होने के साथ आर्टिफिशियल कलर के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा होती रही है।
यूरोप के कुछ देशों में कुछ आर्टिफिशियल रंगों वाले खाद्य पदार्थों पर पैकेजिंग के सामने विशेष चेतावनी देना जरूरी हो सकता है। वहीं भारत में पोषण संबंधी जानकारी मुख्य रूप से पैकेट के पीछे दी जाती है।
इस वजह से सवाल उठता है कि क्या उपभोक्ता को प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी वास्तविक पोषण गुणवत्ता का अंदाजा आसानी से हो पाता है?
KitKat में कोको की मात्रा भी अलग बताई जाती है
KitKat को लेकर भी अलग-अलग देशों में बिकने वाले वर्जन की सामग्री की तुलना सामने आती रही है। भारतीय वर्जन में कोको सॉलिड की मात्रा ऑस्ट्रेलियाई वर्जन की तुलना में कम होने की बात कही जाती है।
इससे यह साफ होता है कि एक ही ब्रांड का प्रोडक्ट अलग-अलग बाजारों में स्थानीय नियमों, कीमत, उपलब्ध कच्चे माल और उपभोक्ताओं की पसंद के हिसाब से अलग फॉर्मूले के साथ तैयार किया जा सकता है।
Maggi में तेल का भी बदल जाता है खेल
Maggi के मामले में भी भारत और ब्रिटेन के कुछ वर्जन की सामग्री को लेकर तुलना की जाती है। भारत में बिकने वाले कई वर्जन में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है, जबकि ब्रिटेन में उपलब्ध कुछ वर्जन में सनफ्लावर ऑयल इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिलती है।
दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन में बिकने वाले कुछ Maggi पैकेट भारत में ही तैयार किए जाते हैं। इसके बावजूद वहां पैकेट के सामने हाई-सॉल्ट चेतावनी प्रमुख रूप से दिखाई देती है, जबकि भारत में ऐसी जानकारी उसी तरह सामने नहीं आती।
Cerelac को लेकर भी उठे थे सवाल
Nestlé के Cerelac को लेकर भी भारत और दूसरे देशों के उत्पादों की तुलना ने काफी चर्चा बटोरी थी। भारत में लंबे समय तक उपलब्ध कुछ Cerelac वेरिएंट में अतिरिक्त चीनी के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे।
कंपनी ने 2024 में भारत में बिना अतिरिक्त चीनी वाला Cerelac पेश करने की घोषणा की थी। इसके बाद पैकेज्ड बेबी फूड में चीनी की मात्रा और उत्पादों की संरचना को लेकर बहस और तेज हुई।
असली सवाल प्रोडक्ट से ज्यादा लेबलिंग का?
भारत में फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी खाद्य पदार्थ में चीनी, नमक या फैट की मात्रा अधिक है, तो इसकी जानकारी उपभोक्ता को पैकेट के सामने ही साफ और आसानी से समझ आने वाले तरीके से मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर खाद्य उद्योग का तर्क है कि अलग-अलग देशों में उत्पादों की रेसिपी बदलना असामान्य नहीं है। स्वाद, कीमत, स्थानीय नियम, उपलब्ध सामग्री और उपभोक्ताओं की पसंद के आधार पर कंपनियां अपने प्रोडक्ट में बदलाव कर सकती हैं।
खरीदारी करते समय पैकेट का पिछला हिस्सा जरूर पढ़ें
ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी है कि केवल ब्रांड का नाम या पैकेजिंग देखकर प्रोडक्ट को हेल्दी न मानें। खरीदने से पहले पैकेट पर दिए Nutrition Facts और Ingredients को जरूर पढ़ें।
खास तौर पर प्रति 100 ग्राम में कितनी चीनी, नमक और फैट है, इसका ध्यान रखें। इस्तेमाल किए गए तेल की जानकारी भी देखें।
एक आसान नियम यह है कि Ingredients List में जो चीज सबसे ऊपर लिखी होती है, वह आमतौर पर मात्रा के हिसाब से सबसे अधिक होती है।
इसलिए अगली बार किसी विदेशी ब्रांड का पैकेट खरीदते समय सिर्फ नाम और विज्ञापन न देखें—लेबल भी पढ़ें, क्योंकि एक ही ब्रांड का मतलब हर देश में एक जैसी रेसिपी होना जरूरी नहीं है।




