छत्तीसगढ़

अब ITR से तय होगा सड़क हादसे का मुआवजा! सुप्रीम कोर्ट ने बदल दिए नियम, जानिए किसे कितना मिलेगा और कैसे होगी आय की गणना

मोटर दुर्घटना मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन जारी, वेतनभोगी, स्वरोजगार और ITR न भरने वालों के लिए अलग-अलग मानक तय।

नई दिल्ली। मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजे की गणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पूरे देश के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब दुर्घटना में मृतक या घायल व्यक्ति की आय तय करने के लिए एक समान प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिससे अलग-अलग अदालतों में अलग-अलग तरीके से मुआवजा तय होने की स्थिति खत्म हो सके।

यह फैसला विशेष रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं करने वाले व्यक्तियों के मामलों पर लागू होगा।

क्यों जारी करनी पड़ी नई गाइडलाइन?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक बीमा कंपनी की अपील पर सुनवाई के दौरान आया। मामले में हाईकोर्ट ने मृतक के पिछले पांच वर्षों के आयकर रिटर्न में दर्ज सबसे अधिक आय वाले वर्ष को आधार बनाकर मुआवजा तय किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तरीके को उचित नहीं माना। अदालत ने कहा कि केवल सबसे अधिक आय वाले वर्ष को आधार बनाने से मुआवजे की राशि वास्तविक आय से अधिक हो सकती है, जिससे संतुलन प्रभावित होता है और बीमा कंपनियों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ सकता है।

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए क्या होगा नियम?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वेतनभोगी कर्मचारियों की आय सामान्यतः स्थिर रहती है। इसलिए ऐसे मामलों में सबसे हालिया आयकर रिटर्न (ITR) को वास्तविक आय का सबसे विश्वसनीय आधार माना जाएगा और उसी के आधार पर मुआवजे की गणना की जाएगी।

स्वरोजगार करने वालों के लिए तीन साल की औसत आय

दुकानदारों, छोटे कारोबारियों, फ्रीलांसरों और अन्य स्वरोजगार करने वाले लोगों की आय हर वर्ष बदल सकती है। ऐसे मामलों में केवल एक वर्ष के ITR पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया है कि पिछले तीन वर्षों की औसत आय को आधार बनाकर मुआवजा तय किया जाए, ताकि वास्तविक आय का अधिक सटीक आकलन हो सके।

असामान्य आय या नुकसान पर क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी वर्ष किसी विशेष कारण, जैसे संपत्ति की बिक्री, बोनस या अन्य एकमुश्त आय के कारण आय असामान्य रूप से अधिक हो, या किसी वर्ष असाधारण नुकसान हुआ हो, तो केवल उसी वर्ष के आंकड़ों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाएगा।

ऐसे मामलों में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) परिस्थितियों का मूल्यांकन करते हुए उचित कारण दर्ज कर अलग निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा।

ITR नहीं होने पर कैसे तय होगी आय?

यदि पीड़ित ने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो उसकी आय निर्धारित करने के लिए बैंक स्टेटमेंट, वेतन पर्ची (Salary Slip), फॉर्म 26AS और अन्य विश्वसनीय दस्तावेजों का सहारा लिया जा सकता है। हालांकि, अदालत को अपने आदेश में स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि आय किस आधार पर तय की गई और ITR का उपयोग क्यों नहीं किया गया।

व्यवसाय की संभावित वृद्धि का भी होगा आकलन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के मामलों में केवल वर्तमान आय ही नहीं, बल्कि उनके व्यवसाय की संभावित वृद्धि और भविष्य की कमाई पर भी विचार किया जाएगा। इससे मुआवजा अधिक न्यायसंगत और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तय किया जा सकेगा।

पूरे देश में लागू होंगे नए नियम

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ये दिशानिर्देश देशभर के सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों (MACT) और उच्च न्यायालयों को भेजे जाएं, ताकि सभी जगह मुआवजा तय करने की प्रक्रिया में एकरूपता बनी रहे।

मुआवजे के लिए कैसे करें दावा?

मोटर दुर्घटना में घायल व्यक्ति या मृतक के परिजन मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दावा दायर कर सकते हैं। यह दावा उस क्षेत्र के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में किया जा सकता है, जहां दुर्घटना हुई हो या जहां पीड़ित अथवा प्रतिवादी निवास करता हो। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ट्रिब्यूनल मुआवजे पर फैसला देता है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मोटर दुर्घटना मुआवजा व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे मुआवजा तय करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, संतुलित और न्यायसंगत बनने की उम्मीद है, साथ ही पूरे देश में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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