पत्नी का ‘पालतू चूहा’ और टेक्स्ट मैसेज बना तलाक की राह, हाईकोर्ट ने पति को दी मंजूरी
पति-पत्नी के बीच मतभेद और मानसिक क्रूरता का मामला, बेटे के लिए हर माह गुजारा भत्ता तय।

बिलासपुर। एक तलाक के मामले में हाईकोर्ट ने पति को अपनी पूर्व पत्नी से तलाक लेने की अनुमति दी है। मामला रायपुर के दंपती का है, जिनकी शादी 28 जून 2009 को हुई थी और 5 जून 2010 को उनका एक बेटा हुआ।
फैमिली कोर्ट ने पहले ही पति की याचिका मंजूर की थी, लेकिन पत्नी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने पति के माता-पिता से अलग रहने की जिद और मानसिक क्रूरता को मान्यता देते हुए तलाक की मंजूरी दी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा भेजे गए एक टेक्स्ट मैसेज को भी सबूत माना। इसमें पत्नी ने लिखा था कि “अगर तुम अपने माता-पिता को छोड़कर मेरे साथ रहना चाहते हो तो जवाब दो, वरना मत पूछो।” इस मैसेज से यह साबित हुआ कि पति-पत्नी के बीच विवाद गंभीर था।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की आय और स्थिति का आंकलन करते हुए पाया कि पत्नी लाइब्रेरियन के पद पर हैं और पति छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक में अकाउंटेंट हैं। इसके परिणामस्वरूप, पति को पत्नी को 5 लाख रुपए का स्थायी गुजारा भत्ता और बेटे को हर माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया।
इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय संयुक्त परिवार की व्यवस्था में पति द्वारा माता-पिता से अलग रहने की जिद और मानसिक क्रूरता तलाक का गंभीर कारण बन सकती है

