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दिल्ली में फिर दिखा यमुना का रौद्र रूप, निचले इलाकों में बाढ़, घरों में घुसा पानी

भारी बारिश और बैराज से लगातार छोड़ा जा रहा पानी अब यमुना में उफान के रूप में सामने आ रहा है. यमुना लगातार खतरे के निशान के ऊपर बह रही है. इस कारण दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है.

गली-सड़क के साथ लोगों के घरों तक के भीतर यमुना का पानी पहुंच चुका है.

बात करें आंकड़ों की तो सुबह 5 बजे पुराने रेलवे ब्रिज के पास यमुना का जलस्तर 207.47 मीटर पर दर्ज किया गया, जो सुबह 6 बजे तक 207.48 मीटर तक पहुंच गया और अभी भी उस स्तर पर बना हुआ है.

हर घंटे बैराज से छोड़ा जा रहा लाखों क्यूसेक पानी

बाढ़ कंट्रोल डिपार्टमेंट के मुताबिक, सुबह से हर घंटे लाखों क्यूसेक पानी हरियाणा की तरफ से यमुना में छोड़े गए. सुबह 5 बजे हथिनीकुंड बैराज से 1,53,172 क्यूसेक, वजीराबाद बैराज से 1,90,390 और ओखला बैराज से 2,35,550 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया.

वहीं यह आंकड़ा 6 बजे क्रमशः 1,48,443 क्यूसेक, 1,93,090 क्यूसेक और 2,35,550 क्यूसेक दर्ज किया गया. जबकि सुबह 7 बजे हथिनीकुंड बैराज से 1,43,184 क्यूसेक, वजीराबाद से 1,93,090 और ओखला बैराज से 2,40,002 क्यूसेक तक का हो गया, जिससे हर घंटे दिल्ली के अन्य इलाकों में भी बाढ़ की आशंका बनती नजर आने लगी.

तड़के घरों में घुस यमुना का पानी, सो रहे लोगों ने लगाई प्रशासन से मदद की गुहार

बात करें बाढ़ प्रभावित निचले इलाकों की तो बीते कुछ दिनों से मुनादी करवा कर लोगों को खादर इलाका छोड़ने की अपील की जा रही थी. लेकिन लोग अपने घरों में डटे रहे. वहीं, कल बुधवार तड़के जब यमुना का पानी उनके घरों में भरने लगा, तब वे प्रशासन से मदद की गुहार लगाने लगे.

अलर्ट टीम ने भी तुरंत रेस्क्यू अभियान चला कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. सैकड़ों लोगों को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है. अब तक करीब 15,000 लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है.

इन इलाकों में भरा यमुना का पानी

बता दें कि बदरपुर खादर, गढ़ी मांडू, पुराना उस्मानपुर गांव, मोनेस्ट्री, यमुना बाजार, यमुना खादर स्थित विश्वकर्मा कालोनी और प्रधान गार्डन में यमुना के पानी ने सबकुछ अपने आगोश में ले लिया है. यमुना खादर में प्रधान गार्डन इलाके में भी चार फीट तक पानी भर गया. यहां रहने वाले लोग पानी से होते हुए घर का सामान ले जाते हुए नजर आए.

बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में राहत शिविर नहीं हैं. इसलिए कुछ लोग पानी भरने के बावजूद अपने घरों के दूसरे मंजिल पर रह रहे हैं, तो कुछ लोग फुटपाथ और डिवाइडर पर तिरपाल डालकर रह रहे हैं. कईयों के पास तिरपाल भी नहीं है.

48 से 50 घंटो में दिल्ली पहुंचता है बैराज का पानी

ऐसे भी हालात देखने को मिले जहां एक महिला सड़क पर बारिश में हाथ में छाता लेकर अपने बच्चों के लिए खाना बना रही थी. बता दें कि बैराज से छोड़ा गया पानी 48 से 50 घंटों में दिल्ली पहुंचता है. यमुना का चेतावनी स्तर 204.50 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 205.33 मीटर है.

जलस्तर 206 मीटर पहुंचते ही प्रशासन निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर स्थानांतरित करना शुरू कर देता है. इससे पहले 13 जुलाई 2023 को यमुना के जलस्तर ने 208.66 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा था, जिससे राजधानी के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे.

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