तेगलूदेशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के टीटीडी ट्र्स्ट में गैर हिंदुओं की नियुक्ति के फैसले को पलटने का ऐलान कर दिया हैं।

तेगलूदेशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के टीटीडी ट्र्स्ट में गैर हिंदुओं की नियुक्ति के फैसले को पलटने का ऐलान कर दिया हैं।
* राज्य के मंदिरों में केवल हिंदुओं को ही काम पर रखा जाएगा।
* ‘नाई ब्राह्मणों’ (मंदिरों में काम करने वाले नाई) के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपए दिया जाएगा।
* वेद विद्या प्राप्त करने वाले बेरोजगार युवाओं को भी 3,000 रुपए मासिक भत्ता दिया जाएगा।
* विभिन्न मंदिरों में काम कर रहे 1683 अर्चकों (पुजारियों) का वेतन 10,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए महीना करने की घोषणा की है।
* राज्य सरकार ने ‘धूप दीप नैवेद्यम योजना’ के तहत छोटे मंदिरों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को 5,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति माह करने का निर्णय लिया है।
चंद्राबाबू ने मंदिर में गैर हिंदू को चेयरमैन बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि तिरुमला में सिर्फ गोविंदा के नाम के अलावा कुछ और सुनाई नहीं देगा। यहां ओम नमो वेंकेटेश्वराय के अलावा किसी अन्य जयघोष नहीं होगा।
■ जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में टीटीडी के चेयरमैन भुमना करुणाकर रेड्डी को तिरुमति देवस्थानम प्रबंधन का चेयरमैन बनाया गया था। करुणाकर रेड्डी का परिवार क्रिश्चियन धर्म का पालन करता है, इस कारण उनकी नियुक्ति पर काफी विवाद हुआ था।
■ हिंदू समुदाय के धर्मगुरुओं के साथ टीडीपी और बीजेपी ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। आंध्र प्रदेश की आबादी 8. 24 करोड़ है, जिनमें से 82 फीसदी हिंदू हैं। चंद्रबाबू यह फैसला राज्य की सबसे बड़ी आबादी को लुभा रहा है।
■ तिरुपति का श्री वेकेंटश्वरा मंदिर देश का सबसे अमीर मंदिर है। यहां रोजाना औसतन 60 हजार श्रद्धालु आते हैं। हर साल देश के सभी हिस्सों से 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालु तिरुपति बालाजी के मंदिर पहुंचते हैं।
■ मंदिर के पास 37 हजार करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है और साल में 1500 करोड़ रुपये अधिक का चढ़ावा आता है। इसके अलावा मंदिर के पास 10.5 टन सोने का भंडार भी है।
■ तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ट्रस्ट भक्तों के भोजन, सुविधा के साथ इससे जुड़े संस्थानों की देखरेख पर हर साल 4000 करोड़ रुपये अधिक खर्च करता है। पिछले साल टीटीडी बोर्ड ने 4,411 करोड़ रुपए का बजट पास किया था।
सीएम नायडू ने राज्य के हर मंदिर में आध्यात्मिकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मंदिरों और उनके आसपास के इलाकों को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए, ताकि वहाँ आध्यात्मिक माहौल बना रहे।


