छत्तीसगढ़

काम पर गया था, लौटकर शव बनकर आया! करंट लगने से लाइनमैन की मौत, अब ठेकेदारी सिस्टम पर उठे सवाल

कोरबा में खंभे पर चढ़कर तार बदल रहा था सतीश अग्रवाल, सुरक्षा उपकरण तक नहीं थे। परिजनों का चक्काजाम और सीएसईबी की बेपरवाही बनी सुर्खियां।

कोरबा, छत्तीसगढ़।
एक बार फिर एक मजदूर की जान लापरवाही की भेंट चढ़ गई। लाइनमैन सतीश अग्रवाल, जो रोज़ की तरह काम पर निकला था, आज घर लौट नहीं सका।
गेवरा बस्ती धरमपुर में जब वह बिजली के तार बदल रहा था, तभी तेज करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

यह दर्दनाक हादसा कुसमुंडा थाना क्षेत्र में हुआ, जहां बिना सुरक्षा उपकरण और बिना किसी निगरानी के खतरनाक काम कराए जा रहे हैं।

 हादसा कैसे हुआ?

  • सतीश, महिपाल कौशिक के घर नई बिजली लाइन जोड़ने गया था।

  • सीढ़ी लगाकर खंभे पर चढ़ा, और जैसे ही उसने तार को छुआ, तेज करंट लगने से नीचे गिर गया।

  • मौके पर मौजूद ठेका कर्मी लखन निर्मल ने बताया – “चूंकि दूसरा साथी चप्पल पहनकर था, इसलिए सतीश को ही ऊपर चढ़ना पड़ा।”

 कुसमुंडा पुलिस मौके पर पहुंची, परिजन भड़के

हादसे के बाद परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया, और मुआवजे की मांग को लेकर अड़े रहे।

  • थाना प्रभारी युवराज तिवारी ने ₹70,000 की फौरी सहायता राशि दी, तब जाकर जाम समाप्त हुआ।

 सीएसईबी ने झाड़ा पल्ला, सवालों के घेरे में ठेकेदारी व्यवस्था

  • सीएसईबी (छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी) ने सतीश को अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया।

  • जबकि लाइन के अधिकारी प्राइवेट तौर पर ठेका कर्मियों से खतरनाक काम करवा रहे हैं, वह भी बिना सुरक्षा गियर के।

कर्मचारी नहीं माना गया, मुआवजा नहीं तय, और मौत का जिम्मेदार कोई नहीं!

 अब सवाल ये उठता है…

  • जब जान जोखिम में डालकर काम लिया जा रहा था, तो सुरक्षा किट क्यों नहीं दी गई?

  • ठेका कर्मियों से ऐसा कार्य करवाना किसके निर्देश पर हो रहा है?

  • क्या इसी तरह एक और मजदूर की जान जाने का इंतजार है?

 मांग है कि:

  • मृतक के परिवार को सरकारी मुआवजा दिया जाए

  • ठेकेदारी प्रथा की समीक्षा हो

  • बिना सुरक्षा उपायों के काम करवाने वाले अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय हो

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