छत्तीसगढ़

खरीफ 2025-26 में बड़ा खुलासा: धान उपार्जन में होगी कड़ी जांच, खसरा में कोई गलती भारी पड़ सकती है!

महासमुंद कलेक्टर ने अधिकारियों को डिजिटल गिरदावरी प्रशिक्षण दिया, 817 कर्मचारियों के साथ होगा सत्यापन, गलत प्रविष्टि पर जिम्मेदारी तय।


महासमुंद। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान उपार्जन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी सत्यापन प्रशिक्षण प्रदान किया।

कलेक्टर लंगेह ने स्पष्ट किया कि एकीकृत किसान पोर्टल में किसान पंजीयन और फसल रकबे का अद्यतन 31 अक्टूबर 2025 तक अनिवार्य है। इस वर्ष खरीफ धान खरीदी केवल एग्रीस्टैक फार्मर आईडी से ही संभव होगी। पोर्टल पर गलत या अधूरी प्रविष्टि धान उपार्जन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गिरदावरी सत्यापन पूरी पारदर्शिता और गंभीरता से किया जाए। यदि किसी खसरे में संशोधन करना हो, तो उसका सत्यापन अनिवार्य है। इसके लिए पीवी मोबाइल ऐप का उपयोग करना होगा। जिले में 817 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, और कम से कम 5 प्रतिशत खसरा का सत्यापन अनिवार्य रूप से करना होगा।

कलेक्टर ने विशेष ध्यान देने की हिदायत दी कि वन अधिकार पट्टा, डुबान क्षेत्र और नगरीय क्षेत्र में भी किसान ऐप के माध्यम से सत्यापन किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि धान फसल के रकबे में गलत प्रविष्टि या बढ़ाकर प्रविष्टि करना न केवल उपार्जन प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि जिम्मेदारी भी तय होगी।

कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि प्रशिक्षण में बताई गई प्रक्रिया का सख्ती से पालन करें और समय-सीमा में सत्यापन का कार्य पूरा करें, ताकि खरीफ 2025-26 में धान उपार्जन पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी हो।

Related Articles

Back to top button