“उधारी नहीं चुकाई तो व्यापारी ने किया ‘काली दरबार’ का ऐलान! ट्रॉली में लगाई देनदारों की तस्वीरें, शहर में मचा हड़कंप”
डेढ़ करोड़ की बकाया रकम वसूलने के लिए युवक का अनोखा विरोध, मंदिर-मंदिर कर नापते निकला जुलूस; पुलिस भी हरकत में

उधारी के पैसे डूबे तो सड़कों पर उतरा व्यापारी
रायगढ़। उधार के पैसे वापस पाने के लिए लोग फोन, नोटिस और कोर्ट का सहारा लेते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक व्यापारी ने ऐसा कदम उठाया कि पूरा शहर हैरान रह गया।
बकाया रकम नहीं मिलने से परेशान एक युवा व्यापारी ने ट्रॉली में काली माता का दरबार सजाकर देनदारों के खिलाफ अनोखा विरोध दर्ज कराया।
ट्रॉली में काली दरबार… और साथ में देनदारों की तस्वीरें
व्यापारी मनोज देवांगन, जो कोसा कपड़ा व्यवसाय से जुड़े हैं, ने व्यापार के दौरान कई लोगों को कपड़ा उधार में दिया था। लेकिन समय बीतने के बाद भी भुगतान नहीं मिला।
बार-बार तकादा करने के बावजूद जब पैसे नहीं लौटे, तो उन्होंने विरोध का अलग ही रास्ता चुना—
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एक ठेले/ट्रॉली में काली माता का दरबार सजाया
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परिवार सहित शहर के प्रमुख मार्गों पर कर नापते हुए पदयात्रा निकाली
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ट्रॉली में उन व्यापारियों की तस्वीरें लगाईं, जिन पर उधारी बाकी है
इस दृश्य को देखने के लिए रास्तों पर लोगों की भीड़ लग गई।
डेढ़ करोड़ रुपये की देनदारी!
बताया जा रहा है कि कारोबारी के ही समाज के करीब 6 व्यापारियों पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये की रकम बकाया है, जो लंबे समय से अटकी हुई है।
आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव से परेशान होकर मनोज ने यह अनोखा विरोध किया, जिससे पूरे शहर में चर्चा शुरू हो गई।
पुलिस ने दी समझाइश
मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस ने व्यापारी को समझाइश दी है और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हालांकि यह विरोध शहर में चर्चा का विषय बन चुका है—कुछ लोग इसे हिम्मत भरा कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे विवादित तरीका मान रहे हैं।
सवाल खड़ा करता है यह मामला
क्या उधारी वसूली के लिए ऐसे सार्वजनिक विरोध सही हैं?
या फिर बढ़ते आर्थिक दबाव का यह एक संकेत है?
रायगढ़ की यह घटना अब सिर्फ उधारी का मामला नहीं, बल्कि शहर में चर्चा और बहस का मुद्दा बन चुकी है।
एक व्यापारी की बेबसी ने सड़कों को मंच बना दिया… अब देखना है कि पैसे लौटते हैं या विवाद और गहराता है।


