350 से ज्यादा बड़े फैसले… छत्तीसगढ़ में चुपचाप बदल रही सिस्टम की तस्वीर!
डिजिटल क्रांति, पारदर्शिता और सुशासन की नई पटकथा—क्या सच में बदल जाएगा प्रशासन?

350 से ज्यादा बड़े फैसले… छत्तीसगढ़ में चुपचाप बदल रही सिस्टम की तस्वीर!
डिजिटल क्रांति, पारदर्शिता और सुशासन की नई पटकथा—क्या सच में बदल जाएगा प्रशासन?
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवाओं को मजबूती देने के लिए 350 से अधिक अहम सुधार लागू किए हैं। इन फैसलों ने प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव की नींव रख दी है। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से आम जनता को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह शासन मिलेगा।
🔍 शराब नीति से जमीन तक—कई बड़े बदलाव
नई आबकारी नीति के तहत शराब बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होलोग्राम अनिवार्य किया गया है, ताकि नकली शराब पर रोक लग सके। भूमि विवादों को कम करने के लिए जियो-रिफरेंसिंग तकनीक लागू की गई है। बिजली कनेक्शन के लिए अर्थदंड भुगतान की ऑनलाइन व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है।
💻 हर विभाग में ई-ऑफिस, खरीद अब जेम पोर्टल से
सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर फाइलों को डिजिटल कर दिया है। शासकीय खरीद अब Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के जरिए की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
उद्योग विभाग का सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 शुरू कर उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब अधिकांश अनुमतियां पूरी तरह ऑनलाइन मिल रही हैं।
🎯 ‘सुशासन तिहार’ से लेकर फेलोशिप तक
8 अप्रैल से 31 मई 2025 तक पूरे प्रदेश में ‘सुशासन तिहार’ का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों आवेदनों का निराकरण किया गया। युवाओं को प्रशासन से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप शुरू की गई है।
🏠 घर बैठे रजिस्ट्री, तुरंत नामांतरण
पंजीयन प्रणाली में 10 बड़े सुधार किए गए हैं। आधार आधारित प्रमाणीकरण, ऑनलाइन सर्च-डाउनलोड, डिजिटल लॉकर, घर बैठे रजिस्ट्री और तुरंत नामांतरण जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं।
प्रदेश की 1460 पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र खोले गए हैं। अब 90 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
📊 स्मार्ट गवर्नेंस की ओर कदम
मुख्यमंत्री सुपर-100 ई-डैशबोर्ड, स्मार्ट मीटरिंग, मोबाइल गवर्नेंस और औषधि दर्पण जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं। नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष का प्रत्यक्ष चुनाव फिर लागू किया गया है।
राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने के साथ नई लॉजिस्टिक नीति लागू की गई है। जनविश्वास विधेयक के जरिए व्यापार और उद्योग से जुड़े कानूनों को सरल बनाया गया है।
