छत्तीसगढ़

मजदूर की झोपड़ी से सपनों का महल तक — जगदलपुर की डिंपल ने रच दी ऐसी कहानी, जिसे सुन भावुक हो जाएंगे आप

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना बनी वरदान, अब राजनांदगांव के प्रतिष्ठित स्कूल में निःशुल्क पढ़ेगी श्रमिक की बेटी

मजदूर की झोपड़ी से सपनों का महल तक — जगदलपुर की डिंपल ने रच दी ऐसी कहानी, जिसे सुन भावुक हो जाएंगे आप

जगदलपुर। कभी जो सपने मजदूर पिता की आंखों में धुंधले दिखते थे, आज वही सपने हकीकत बनकर चमक रहे हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में आई बदलाव की लहर अब दूर-दराज के गांवों तक पहुंच चुकी है। इसी बदलाव की मिसाल बनी है बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलौरी की डिंपल कश्यप।

एक पंजीकृत श्रमिक नंदकिशोर कश्यप की बेटी डिंपल ने अपनी मेधा और अथक परिश्रम के दम पर राज्य की प्रावीण्य सूची में स्थान बनाते हुए राजनांदगांव के प्रतिष्ठित संस्कार सिटी स्कूल में प्रवेश हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। डिंपल फिलहाल कक्षा छठवीं में अध्ययनरत है और बारहवीं तक पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करेगी।

🏫 योजना ने बदली किस्मत

इस सफलता के पीछे राज्य शासन की अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की अहम भूमिका है। इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल ने डिंपल की माध्यमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक तक की पूरी शिक्षा का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है। इससे परिवार पर आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया है।

😢 पिता की आंखों में छलके आंसू

डिंपल के पिता नंदकिशोर कश्यप भावुक स्वर में कहते हैं, “एक मजदूर के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। हम दिन-रात मेहनत सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि हमारे बच्चों का भविष्य हमारे संघर्ष से बेहतर हो सके।”
आज उनकी बेटी ने वही सपना साकार कर दिखाया है, जिसे वे कभी हिचकते हुए देखते थे।

🌈 गांव से ग्लोबल सपनों की उड़ान

ग्राम बिलौरी-2 से निकलकर एक प्रतिष्ठित स्कूल तक पहुंचने का डिंपल का यह सफर हर उस परिवार के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने बच्चों की प्रतिभा को दबा देते हैं। यह कहानी बताती है कि यदि लगन और प्रतिभा हो, तो सरकारी योजनाएं एक मजबूत पुल बनकर सपनों को मंजिल तक पहुंचा सकती हैं।

आज कश्यप दंपत्ति को विश्वास है कि उनकी बेटी न केवल सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रही है, बल्कि वह उस ऊंचाई को भी छुएगी, जिसकी उन्होंने कभी सिर्फ कल्पना की थी।

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