11 साल में लिया एक फैसला… और अब इतिहास रच दिया, पानी में उतरी अंजलि बनी गोल्डन गर्ल
कभी खेल समझकर चुनी थी तैराकी, अब उसी ने दिलाया पहला स्वर्ण, हर किसी को चौंका रही है ये कहानी

कभी एक साधारण-सा फैसला, जो शायद उस वक्त खुद अंजलि मुंडा के लिए भी खास नहीं रहा होगा, आज एक बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है। ओडिशा के जाजपुर जिले के छोटे से गांव गहिरागड़िया से निकलकर आई इस किशोरी ने रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है। महज 15 साल की उम्र में अंजलि इस प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बन गई हैं, और उनकी यह उपलब्धि अब हर किसी को हैरान कर रही है।
साल 2022 में जब स्कूल में खेल चुनने का मौका मिला, तब 11 साल की अंजलि ने तैराकी को चुना। उस समय यह सिर्फ पानी में खेलने जैसा एक सामान्य खेल था, लेकिन धीरे-धीरे यही खेल उनकी पहचान बनता चला गया। बिना किसी खास बैकग्राउंड और संसाधनों के, उन्होंने अपने दम पर तैराकी में ऐसी पकड़ बनाई कि आज राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।
चार भाई-बहनों में सबसे छोटी अंजलि का सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता एक फैक्ट्री में वैन चालक हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद अंजलि ने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में दाखिला मिलने के बाद उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण मिला, जिसने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई।
शुरुआत में अपनी बहन से प्रेरित होकर खेलों की दुनिया में कदम रखने वाली अंजलि ने तीरंदाजी के बजाय तैराकी को चुना और यहीं से उनकी अलग पहचान बननी शुरू हुई। तैराकी शुरू करने के महज एक साल के भीतर ही उन्होंने एक स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर संकेत दे दिया था कि वह कुछ बड़ा करने वाली हैं। वह पहला पदक उनके लिए सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का आधार बना।
रायपुर में हुए मुकाबले में अंजलि ने 200 मीटर फ्रीस्टाइल में 2 मिनट 39.02 सेकंड का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने मजबूत मानी जाने वाली कर्नाटक टीम को भी पहले दिन सभी स्वर्ण जीतने से रोक दिया। यह प्रदर्शन उनके निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम है।
अंजलि अपनी इस सफलता का श्रेय खेल मंत्रालय की पहल और अस्मिता लीग को देती हैं, जहां उन्होंने पहले भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीते थे। गुवाहाटी में हाल ही में हुए मुकाबलों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। हालांकि इस बड़ी जीत के बावजूद वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका मानना है कि वह अपने प्रदर्शन को और बेहतर कर सकती थीं, क्योंकि उनका लक्ष्य इससे भी बेहतर समय निकालने का था।
अब उनकी नजर आने वाले मुकाबलों पर टिकी है, जहां वह 50 मीटर और 100 मीटर बैकस्ट्रोक के साथ 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली में भी उतरेंगी। अंजलि का यह सफर यह साबित करता है कि कभी-कभी एक छोटा-सा फैसला भी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकता है, और यह स्वर्ण पदक उनकी कहानी की शुरुआत भर है।

