छत्तीसगढ़

फर्जी दस्तावेजों का साया या सियासी साजिश, राधिका खेड़ा के आरोपों से घिरा मामला, जांच की आंच कहां तक पहुंचेगी

विनोद वर्मा पर गंभीर सवाल, पवन खेड़ा पहले से जांच के घेरे में, असम कनेक्शन ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

रायपुर/दिल्ली।
फर्जी दस्तावेजों के आरोपों ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बीजेपी नेत्री राधिका खेड़ा ने दावा किया है कि कांग्रेस से जुड़े विनोद वर्मा ने पहले भूपेश बघेल और अब पवन खेड़ा को कथित तौर पर फंसा दिया है। इस आरोप के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद
राधिका खेड़ा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सीधे तौर पर विनोद वर्मा को टैग करते हुए सवाल उठाए हैं कि क्या उन्होंने ही पवन खेड़ा को कथित “फर्जी दस्तावेज” उपलब्ध कराए थे। उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए यह भी संकेत दिया कि पहले भी इस तरह के आरोप सामने आ चुके हैं।

क्या है पूरा मामला
दरअसल, 5 अप्रैल को पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां भी हैं, जिनका खुलासा चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया।

इन आरोपों के बाद रिंकी भुइयां सरमा की शिकायत पर गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने पवन खेड़ा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। इसके साथ ही यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गर्मा गया।

जांच में नया एंगल, बढ़ी मुश्किलें
सूत्रों के अनुसार, असम सरकार को इस मामले से जुड़े कुछ दस्तावेज प्राप्त हुए हैं और अब जांच का फोकस इस बात पर है कि ये कथित दस्तावेज आखिर पवन खेड़ा तक पहुंचे कैसे। इसी कड़ी में विनोद वर्मा का नाम चर्चा में आ रहा है, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है।

सियासत में बढ़ता तनाव, आरोप-प्रत्यारोप तेज
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस पर बिना जांच के आरोप लगाने का आरोप लगाया था। अब राधिका खेड़ा के ताजा बयान के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अहम
इस पूरे मामले में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय है। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की बेंच इस पर विचार करेगी। आने वाले समय में यह सुनवाई इस केस की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल यह मामला आरोपों और काउंटर आरोपों के बीच उलझा हुआ है, लेकिन जांच की दिशा और अदालत की कार्यवाही यह तय करेगी कि सच्चाई क्या है और इस सियासी तूफान का अगला पड़ाव कहां होगा।

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