भारत का ‘महाविनाशक’ दांव! अग्नि-5 के एक टेस्ट से कांपे दुश्मन, अब एक साथ कई शहर बन सकते हैं निशाना
5000KM से ज्यादा रेंज वाली मिसाइल ने दिखाई ऐसी ताकत, चीन और पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का ऐसा प्रदर्शन दिखाया है, जिससे दुश्मन देशों की नींद उड़ सकती है। एडवांस अग्नि-5 मिसाइल के सफल परीक्षण ने साफ कर दिया है कि अब भारत सिर्फ जवाब देने की नहीं, बल्कि एक साथ कई मोर्चों पर दुश्मन को तबाह करने की क्षमता रखता है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार 8 मई 2026 को ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आइलैंड से अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। इस बार मिसाइल में सबसे खतरनाक मानी जाने वाली MIRV तकनीक का इस्तेमाल हुआ, जिसने इस टेस्ट को बेहद खास बना दिया।
MIRV यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक की मदद से यह मिसाइल एक बार में अलग-अलग जगहों पर मौजूद कई दुश्मन ठिकानों को निशाना बना सकती है। आसान भाषा में समझें तो अब एक ही मिसाइल कई शहरों या सैन्य अड्डों पर अलग-अलग वॉरहेड गिराने में सक्षम है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि परीक्षण के दौरान मिसाइल ने हिंद महासागर क्षेत्र में मौजूद अलग-अलग टारगेट्स को सटीक तरीके से हिट किया। जमीन और समुद्र में तैनात हाईटेक ट्रैकिंग सिस्टम लगातार इसकी निगरानी करते रहे और मिशन पूरी तरह सफल रहा।
भारत इससे पहले मार्च 2024 में भी MIRV तकनीक वाली अग्नि-5 का परीक्षण कर चुका है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मिशन दिव्यास्त्र” नाम दिया था। इस तकनीक के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो चुका है, जिनके पास इतनी घातक मिसाइल क्षमता मौजूद है। इस क्लब में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश शामिल हैं।
अग्नि-5 की सबसे बड़ी ताकत इसकी 5000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज है। यानी यह मिसाइल एशिया के बड़े हिस्से तक आसानी से पहुंच सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका MIRV वर्जन एक साथ चार या पांच न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम हो सकता है।
इस सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सेना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगी और भविष्य के खतरों से निपटने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
खास बात यह भी है कि अग्नि-5 के MIRV सिस्टम में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें भारतीय एवियोनिक्स और हाई-एक्यूरेसी सेंसर लगाए गए हैं। 2024 में हुए पहले परीक्षण का नेतृत्व DRDO की महिला वैज्ञानिक ने किया था, जिसमें कई महिला वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई थी।
अब सवाल सिर्फ मिसाइल टेस्ट का नहीं है, बल्कि उस संदेश का है जो भारत ने दुनिया को दिया है। क्योंकि इस परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है। भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि अब उसकी सुरक्षा ढाल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और घातक हो चुकी है।

