सूखते गांवों को बचाने मैदान में उतरे अफसर! महासमुंद में शुरू हुआ बड़ा जल अभियान, हर घर में बनेगा सोखता गड्ढा
27 मई तक 400 जल संरक्षण संरचनाओं का लक्ष्य, गांव-गांव चौपाल और श्रमदान से पानी बचाने की तैयारी तेज

महासमुंद। गर्मी और लगातार घटते जलस्तर के बीच महासमुंद जिले में पानी बचाने को लेकर बड़ा अभियान शुरू किया गया है। “मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0” के तहत जनभागीदारी सप्ताह की शुरुआत होते ही प्रशासन पूरी तरह मैदान में उतर गया है। जिले के गांवों में अब जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की तैयारी तेज हो गई है।
अभियान के पहले दिन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत नंदनवार ने विभिन्न ग्राम पंचायतों का दौरा कर जनसहभागिता से बनाए जा रहे जल संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर हर घर में सोखता गड्ढा बनाने और गांवों में जरूरत के अनुसार जल संरक्षण संरचनाएं तैयार करने की अपील की।
उन्होंने साफ कहा कि पानी बचाना सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से जुड़ा बड़ा अभियान है। अगर अभी पानी नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में गांवों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जिले के सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देश दिए हैं कि जनभागीदारी सप्ताह के दौरान हर ग्राम पंचायत में लोगों की भागीदारी से जल संवर्धन के कार्य कराए जाएं। खास बात यह है कि ये निर्माण कार्य मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन से अलग होंगे।
प्रशासन ने सरपंचों, पंचों और जनप्रतिनिधियों को गांव-गांव चौपाल लगाने, लोगों को जागरूक करने और श्रमदान के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के तहत गांवों की जरूरत के हिसाब से छोटे-छोटे जल संरक्षण ढांचे तैयार किए जाएंगे ताकि बारिश के पानी को ज्यादा से ज्यादा बचाया जा सके।
कलेक्टर विनय लंगेह ने भी सभी निर्माण कार्यों की जानकारी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि 27 मई तक जिले की सभी ग्राम पंचायतों में करीब 400 जल संरक्षण संरचनाएं तैयार कर ली जाएं।
गांवों में शुरू हुए इस अभियान को लेकर अब लोगों में भी उत्साह दिखाई देने लगा है। प्रशासन को उम्मीद है कि जनभागीदारी से चलाया जा रहा यह अभियान आने वाले समय में जल संकट से निपटने की बड़ी मिसाल बन सकता है।


