छत्तीसगढ़

भैंसों से भरी पिकअप, एक लाख की कथित उगाही और वायरल वीडियो… आखिर क्या है डोंगरगढ़ के चर्चित विवाद की सच्चाई?

FIR दर्ज होते ही बदला पूरा खेल, अब ग्रामीणों और गौसेवकों ने खोला मोर्चा, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

डोंगरगढ़। राजनांदगांव जिले के बोरतलाव थाना क्षेत्र में भैंसों से भरी एक पिकअप को रोकने से शुरू हुआ विवाद अब नया और पेचीदा मोड़ ले चुका है। कथित मारपीट, एक लाख रुपये की उगाही, वायरल वीडियो और अब ग्रामीणों व गौसेवकों के हस्तक्षेप ने इस मामले को इलाके की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल कर दिया है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच सच्चाई क्या है, इसका जवाब अब पुलिस जांच पर टिका हुआ है।

मामले की शुरुआत 10 जून को हुई बताई जा रही है। डोंगरगढ़ के डेयरी संचालक मनोज श्रीवास्तव ने 20 जून को बोरतलाव थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि बरमपुर से खरीदी गई तीन भैंसों को लेकर लौट रही उनकी पिकअप को रास्ते में रोक लिया गया था। शिकायत के अनुसार वाहन चालक के साथ मारपीट की गई और वाहन छोड़ने के एवज में एक लाख रुपये की मांग कर कथित रूप से राशि वसूल ली गई।

मनोज श्रीवास्तव, जो डेयरी व्यवसाय के साथ हिंदू संगठनों से भी जुड़े बताए जाते हैं, ने आरोप लगाया कि पूरी घटना के दौरान उनके चालक पर दबाव बनाया गया और उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।

लेकिन एफआईआर दर्ज होने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। 22 जून को ग्राम अंडी के ग्रामीणों और डोंगरगढ़ गौ सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बोरतलाव थाना पहुंचकर पुलिस को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की गई। ग्रामीणों ने दावा किया कि जिस दिन वाहन रोका गया था, उस दौरान कई ऐसे तथ्य और परिस्थितियां थीं, जिनकी गंभीरता से जांच होना जरूरी है।

मामले को और अधिक चर्चित बना रहा है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो, जिसे अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। ग्रामीणों और गौसेवकों का कहना है कि वीडियो सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आया है। घटना 10 जून की बताई जा रही है, जबकि इसकी एफआईआर 20 जून को दर्ज हुई। इसके दो दिन बाद ग्रामीणों और गौसेवा संगठन की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने से मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि कॉल डिटेल, वायरल वीडियो, वाहन से जुड़े दस्तावेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की असल तस्वीर सामने आएगी। यही वजह है कि अब इस मामले को लेकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

फिलहाल बोरतलाव पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं और आखिर इस बहुचर्चित विवाद के पीछे की सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है।

सबहेडिंग:
10 दिन बाद दर्ज हुई FIR, फिर सामने आया ग्रामीणों का ज्ञापन; वायरल वीडियो और उगाही के आरोपों ने बढ़ाई मामले की संवेदनशीलता।

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