छत्तीसगढ़

“देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा”… हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अनवर ढेबर को बड़ा झटका

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मैनपावर सप्लाई घोटाले मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी Anwar Dhebar की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि आर्थिक अपराध सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर हमला हैं और इन्हें ठंडे दिमाग से रची गई साजिश की तरह देखा जाना चाहिए।

जस्टिस Amitendra Kishore Prasad की सिंगल बेंच ने कहा कि इस तरह के घोटाले सरकारी व्यवस्था और जनता के विश्वास दोनों को गहरी चोट पहुंचाते हैं। कोर्ट ने माना कि ऐसे मामलों में आरोपी की पहुंच और प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दरअसल, मामला Chhattisgarh State Marketing Corporation Limited में कथित मैनपावर सप्लाई घोटाले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय Enforcement Directorate की जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ था। 29 नवंबर 2023 को ED ने रायपुर में कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों से 28.80 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। जांच में दावा किया गया कि यह रकम कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान से जुड़ी थी, जिसे भ्रष्टाचार के जरिए वसूला गया।

इसके बाद Anti Corruption Bureau ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, रायपुर नगर निगम के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए CSMCL के प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज पर कथित नियंत्रण बना रखा था।

आरोप है कि मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों के बिल तब तक पास नहीं किए जाते थे, जब तक वे कमीशन नहीं देती थीं। शुरुआत में तय रकम ली जाती थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर यह वसूली बढ़ाकर बिल राशि का एक-तिहाई तक कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि चुनाव के नाम पर वसूली और तेज करने के निर्देश दिए गए थे।

ED ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान ईगल हंटर सॉल्यूशंस एजेंसी से जुड़े लोगों को कथित रिश्वत लेन-देन में पकड़ा था। इसके बाद 23 फरवरी 2026 को अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया।

सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से कहा गया कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाया गया है और एक ही मामले में अलग-अलग FIR दर्ज कर जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। लेकिन राज्य सरकार ने जमानत का कड़ा विरोध किया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ इसलिए राहत नहीं दी जा सकती कि आरोपी प्रभावशाली है या रकम सीधे उसके पास से नहीं मिली। कोर्ट ने अनवर ढेबर को इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता और लाभ लेने वाला बताते हुए कहा कि शुरुआती जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

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