NEP से NEET तक… आखिर क्यों विवादों में घिरा धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल? इस्तीफे के बाद फिर चर्चा में शिक्षा मंत्री के बड़े फैसले
नई शिक्षा नीति, IIT-IIM का विस्तार और मेडिकल शिक्षा में बदलाव जैसी उपलब्धियां, लेकिन NEET-UG और UGC-NET विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें

नई दिल्ली।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद उनका पूरा कार्यकाल एक बार फिर चर्चा में है। एक ओर उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को तेजी से लागू किया, वहीं दूसरी ओर NEET-UG और UGC-NET परीक्षा विवादों ने उनके कार्यकाल को लगातार सवालों के घेरे में रखा।
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा सुधारों को लेकर कई अहम फैसले लिए गए, लेकिन परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी।
NEP 2020 बना सबसे बड़ा शिक्षा सुधार
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करना माना जाता है। करीब तीन दशक बाद आई इस नीति के तहत शिक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव किए गए। छात्रों को विषय चुनने की अधिक स्वतंत्रता, व्यावहारिक शिक्षा पर जोर और नई शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।
IIT-IIM के विस्तार पर दिया विशेष जोर
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। देशभर में IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विस्तार पर फोकस किया गया ताकि अधिक से अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इसके साथ ही मेडिकल शिक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की पहल भी शुरू की गई, जिससे गैर-अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को राहत मिल सके।
NTA में सुधार के लिए बनी हाई लेवल कमेटी
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठते सवालों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। समिति को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
NEET को CBT मोड में कराने की तैयारी
परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से NEET परीक्षा को भविष्य में कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने की दिशा में भी सरकार ने पहल की। इसका मकसद पेपर आधारित परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को कम करना बताया गया।
NEET-UG विवाद बना सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद NEET-UG परीक्षा को लेकर सामने आया। परीक्षा के बाद पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करा दिए। छात्रों और विपक्षी दलों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जिससे सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता गया।
UGC-NET परीक्षा रद्द होने से और बढ़ा विवाद
NEET विवाद के बीच UGC-NET परीक्षा भी विवादों में घिर गई। पेपर लीक की आशंका सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इस फैसले ने NTA की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को और तेज कर दिया तथा परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग जोर पकड़ने लगी।
जंतर-मंतर तक पहुंचा छात्र आंदोलन
NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय तक जारी रहा। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुए और विपक्ष ने भी सरकार को घेरा। छात्रों ने पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, दोषियों पर कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।
इसी राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव के बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई। उनका कार्यकाल एक ओर शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों के लिए याद किया जाएगा, तो दूसरी ओर परीक्षा विवादों और छात्रों के आंदोलनों के कारण भी लंबे समय तक चर्चा में रहेगा।


