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सिंगापुर और हांगकांग के बाद अब नेपाल में भी नहीं बिक सकेंगे कुछ भारतीय मसाला प्रोडक्ट, पड़ोसी देश ने लगाया बैन

सिंगापुर और हांगकांग के बाद अब नेपाल ने भी कथित गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को लेकर भारतीय कंपनियों के कुछ स्पाइस-मिक्स प्रोडक्ट के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाल के फूड टेक्नोलॉजी और क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेंट के अनुसार, MDH और एवरेस्ट के 4 स्पाइस मिक्स प्रोडक्ट्स को संदिग्ध एथिलीन ऑक्साइड या ईटीओ कंटेमिनेशन के कारण शुक्रवार, 17 मई से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके तहत MDH के मद्रास करी पाउडर, सांभर मिक्स्ड मसाला पाउडर और मिक्स्ड मसाला करी पाउडर और एवरेस्ट के फिश करी मसाला पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

 

विभाग ने शुक्रवार को जारी एक नोटिस में कहा, ”चूंकि इन 4 उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है, इसलिए फूड रेगुलेशन 2027 बीएस के आर्टिकल 19 के अनुसार देश के अंदर इन उत्पादों के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हमारा ध्यान उन मीडिया रिपोर्ट पर गया, जिनमें बाजार में इन घटिया उत्पादों की बिक्री और इनके इस्तेमाल के हानिकारक होने के बारे में बताया गया था।”

 

मार्केट से प्रोडक्ट वापस लेने की अपील

नेपाल के फूड टेक्नोलॉजी और क्वालिटी कंट्रोल डिपार्टमेंट ने इंपोर्टस और व्यापारियों से इन प्रोडक्ट्स को बाजार से वापस लेने की भी अपील की है। पिछले महीने, सिंगापुर और हांगकांग ने कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा पैदा करने वाले ईटीओ के संदिग्ध ऊंचे स्तर का हवाला देते हुए MDH और एवरेस्ट के कुछ मसालों की बिक्री रोक दी थी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने तब से देश में विभिन्न ब्रांड्स के पाउडर फॉर्म में मौजूद मसालों की गुणवत्ता जांच करने के लिए कदम उठाए हैं।

 

अगर जल्द नहीं सुलझा मुद्दा तो 40% गिर सकता है मसाला निर्यात

 

शुक्रवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स (FISS) ने कहा कि अगर निर्यात के लिए मसालों में एथिलीन ऑक्साइड कंटेमिनेशन के मुद्दे को जल्द से जल्द हल नहीं किया गया तो वित्त वर्ष 2025 में भारत के मसाला निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार, भारत दुनिया के अग्रणी मसाला उत्पादकों में से एक है, जो लगभग 180 देशों को 200 से अधिक मसालों और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स का निर्यात करता है। वित्त वर्ष 2021-22 में यह निर्यात 4 अरब डॉलर का रहा था।

 

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