छत्तीसगढ़

67 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों की हुंकार! क्या सरगुजा ओलंपिक से निकलेगा अगला राष्ट्रीय सितारा?

आदिवासी अंचल से लेकर शहर तक खेल प्रतिभाओं का महासंगम, मंत्री रामविचार नेताम ने बढ़ाया हौसला

सरगुजा। खेल मैदान में गूंजते जयकारों, दौड़ती सांसों और उड़ते तीरों के बीच सरगुजा ओलंपिक का समापन हुआ—लेकिन पीछे छोड़ गया उम्मीदों की लंबी लकीर। तीन दिवसीय जिला स्तरीय सरगुजा ओलंपिक ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।

आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम गुरुवार को समापन समारोह में शामिल हुए। आयोजन स्थानीय स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय के खेल मैदान में संपन्न हुआ। 10 से 12 फरवरी 2026 तक चले इस खेल महोत्सव में ग्रामीण और शहरी अंचलों से आए खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया।

मंत्री नेताम ने कहा कि सरगुजा ओलंपिक खेल प्रतिभाओं को निखारने का सशक्त माध्यम बन चुका है। विशेष रूप से आदिवासी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिला है। उन्होंने चयनित खिलाड़ियों को निरंतर अभ्यास कर संभाग और राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

इस ओलंपिक में चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया—कुल 67,380 प्रतिभागियों ने भाग लिया। मैदान में उमड़ी यह भीड़ सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सपनों का कारवां थी।

मंत्री नेताम ने खिलाड़ियों के बीच पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया। शंकरगढ़ और बलरामपुर के बीच हुई बालिका रस्साकशी प्रतियोगिता में उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय कर उनका मनोबल बढ़ाया। तीरंदाजी प्रतियोगिता का अवलोकन करते हुए स्वयं भी तीर चलाकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। विजेता प्रतिभागियों को शील्ड और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

जिला स्तरीय ओलंपिक में कुल 12 खेल विधाओं का आयोजन हुआ। एथलेटिक्स (100, 200, 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो, 400 मीटर रिले), तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती, कराटे जैसे व्यक्तिगत खेलों के साथ फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल जैसे दलीय खेल शामिल रहे। प्रतियोगिताएं जूनियर (14–17 वर्ष) और सीनियर (18 वर्ष से अधिक) वर्ग में आयोजित की गईं।

Related Articles

Back to top button