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Atal Bihari Vajpayee 100th Birthday: तीन बार संभाली पीएम की कुर्सी, विरोधी भी करते थे तारीफ, ऐसी थी वाजपेयी जी की राजनीतिक यात्रा

नई दिल्ली: आज पूरे देश में अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती मनाई जा रही है। इस दिन को हर साल भारत में सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिनकी सराहना विपक्षी दल भी करते थे। आज 25 दिसंबर को उनकी जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जैसे पोखरण-2 परमाणु परीक्षण, राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं।

वाजपेयी जी को उनकी कूटनीतिक सूझ-बूझ, भारत के विकास के प्रति प्रतिबद्धता और उनके प्रभावी भाषणों के लिए जाना जाता है। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने कई क्षेत्रों में प्रगति की और उनकी नीतियों को आज भी सराहा जाता है। उनके योगदान को याद करते हुए हर साल उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

तीन बार संभाली पीएम की कुर्सी

वाजपेयी ने तीन बार भारत के प्रधामंत्री की कुर्सी संभाली। पहले 13 दिन तक, फिर 13 महीने तक और उसके बाद 1999 से 2004 तक का कार्यकाल उन्होंने पूरा यिका। इस दौरान उन्होंने ये साबित किया कि देश में गठबंधन सरकारों को भी सफलता से चलाया जा सकता है। आइए जानते हैं वाजपेयी के 10 ऐसे काम जिनके लिए आने वाली पीढ़ियां उन्हें हमेशा याद करेंगी।

वाजेपयी की राजनीतिक यात्रा

अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भारतीय जनसंघ से की, जिसके बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में बदल दिया गया। वे भारतीय राजनीति के एकमात्र नेता थे, जो न केवल विपक्ष में बल्कि सत्ता में भी अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराए थे। वाजपेयी जी ने अपनी राजनीति में हमेशा लोकतंत्र और समाजवाद के मूल्यों को सर्वोपरि माना।

अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का महत्व

अटल बिहारी वाजपेयी ने न केवल भारतीय राजनीति को नया दिशा दी, बल्कि भारतीय समाज के विभिन्न पहलुओं में भी सुधार लाने के प्रयास किए। उनका जीवन प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें अपने कर्तव्यों के प्रति सच्ची निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण का पाठ पढ़ाता है। उनकी जयंती पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को याद करते हैं।

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