छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार: रामलला के स्वागत में जिले के मंदिरों में होगी विशेष सजावट, कलेक्टर सहित अधिकारी कर्मचारियों ने सिद्धेश्वर मंदिर में की साफ-सफाई

बलौदाबाजार। अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले रामलला प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर जिले के जनमानस में अपार हर्ष है और राम भक्ति मय माहौल बना हुआ है. जिले के सभी मंदिरों की साफ -सफाई और सजावट की जा रही है. इसी क्रम में कलेक्टर चंदन कुमार के नेतृत्व में आज पलारी स्थित प्राचीन और ऐतिहासिक श्री सिद्धेश्वर मंदिर परिसर में सफ़ाई अभियान चलाया गया. इस दौरान जिला और विकासखण्ड स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों ने हाथ मे झाड़ू थामकर पूरे मंदिर परिसर की सफाई की. मंदिर परिसर की सफाई के बाद कलेक्टर चंदन कुमार ने उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारियों को स्वच्छता अपनाने और दूसरों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने शपथ दिलाई. कलेक्टर ने इस दौरान श्री सिद्धेश्वर नाथ के दर्शन कर उनकी पूजा-अर्चना भी की.

बता दें कि, नगर पंचायत पलारी में बालसमुंद तालाब के तटबंध पर सिद्धेश्वर मंदिर स्थित है. इस मंदिर का निर्माण लगभग 7-8वीं शती ईस्वी में हुआ था. लाल ईंट निर्मित यह मंदिर पश्चिमाभिमुखी है. मंदिर की द्वार शाखा पर नदी देवी गंगा एवं यमुना त्रिभंगमुद्रा में प्रदर्शित हुई हैं. इस मंदिर के द्वार के सिरदल पर त्रिदेवों का अंकन है. वहीं प्रवेश द्वार स्थित सिरदल पर शिव विवाह का दृश्य सुन्दर ढंग से उकेरा गया है. इसके साथ ही द्वार शाखा पर अष्ट दिक्पालों का अंकन भी है. गर्भगृह में सिध्देश्वर नामक शिवलिंग प्रतिष्ठापित है. इस मंदिर का शिखर भाग कीर्तिमुख, गजमुख एवं व्याल की आकृतियों से अलंकृत है जो चौत्य गवाक्ष के भीतर निर्मित हैं. विद्यमान छत्तीसगढ़ के ईंट निर्मित मंदिरों का यह उत्तम नमूना है.

जानकरी के मुताबिक, यह स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा संरक्षित है. छत्तीसगढ़ राज्य के संरक्षित स्मारकों में से एक यह मंदिर लाल इंटो से बना है, मंदिर के पास कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक मेला का आयोजन होता है. लोग उस दिन सुबह 4 बजे स्नान करने जाते हैं. महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर को सजा दिया जाता है और मेला लगता है. मंदिर के सामने एक तालाब है जो लगभग 120 एकड़ में फैला है. ऐसा कहा जाता है कि यह तालाब छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा तालाब है.

लवकुश की जन्मस्थली मे होगा दीपोत्सव

बलौदाबाजार से 50 किमी दूर कसडोल विकासखंड में स्थित भगवान राम के पुत्र लव कुश की जन्मभूमि पर भी विशेष व्यवस्था प्रशासन द्वारा किया जा रहा है. यहाँ पर जिला प्रशासन व वन विभाग मिलकर ग्रामीणों के सहयोग से दस हजार दीप प्रज्ज्वलित करने वाले है. जिसकी तैयारी हो चुकी है और 22 जनवरी को रामलला की अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर यहाँ पर विशेष पूजा अर्चना कर दीप प्रज्ज्वलित किया जा रहा है. आपको बता दे कि, प्रशासन ने रामवनपथ गमन के तहत इसे चिन्हित किया है और तुरतुरिया को पर्यटन स्थल भी घोषित किया है, जिस पर यहां काम प्रारंभ है.

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