छत्तीसगढ़

भिलाई: चक्रवाती तूफान ने किसानों के साथ बढ़ाई प्रशासन की भी मुसीबतें, खुले में किया धान का भंडारण, बारिश के चलते खरीदी हुई बंद

चक्रवाती तूफान के कारण मौसम के बिगड़े मिजाज ने किसानों के साथ प्रशासन के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। तूफान के कारण कई इलाकों में बारिश हो रही है। यदि ऐसा ही हाल रहा तो खेतों और खलिहान में रखे धान के साथ- साथ खरीदा गया करोड़ों का धान खतरे में पड़ जाएगा। दुर्ग जिले में 10 लाख 25 हजार 358 क्विंटल की धान खरीदी हो चुकी है। वहीं 7 लाख 95 हजार 599 क्विंटल धान का भंडारण खुले में किया गया है। वहीं अब तक मात्र 2 लाख 27 हजार 759 क्विंटल धान का उठाव हुआ है। जिलेभर में 102 धान खऱीदी केन्द्र है जिसमें बारिश के चलते खरीदारी बंद है। इधर मौसम की मार से परेशान किसान के चेहरे पर चिंता और बढ़ गई है। अगर मौसम ऐसा ही रहा तो उनके धान में अंकुरण आ जाएगा।

हो चुकी है 19 हजार क्विंटल धान खरीदी

वहीं दूसरी ओर धान अब भी खरीदी केंद्रों में खुले आसमान के नीचे भंडारित है। बारिश से धान बचाने समितियों में पुराने प्लास्टिक केप कव्हर किए हैं, लेकिन ये भी ज्यादा बारिश से बचाव में कारगर नहीं है। वहीं जहां शेड बने हैं वहां भी बारिश और हवा के कारण धान के बारदानों तक पानी पहुंच रहा है। सिर्फ सेलूद के धान खरीदी केन्द्र की बात करें तो यहां 18 सौ से ज्यादा किसान पंजीकृत है और यहां अब तक 19 हजार क्विंटल की खरीदी हो चुकी है। सोसाइटी के प्रबंधक लक्ष्मीनारायण चंद्राकर का कहना है कि उनकी सोसाइटी में धान पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन शेड के भीतर भी भीगे धान के बोरे इसकी हकीकत को बयां कर रहे हैं।

सताने लगी धान में नमी की चिंता

Bhilai Dhan Kharidi News: सेलूद की सोसाइटी पर टोकन लेने आए पाटन के अचानकपुर गांव के किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। इन किसानों में से अधिकांश के घर मिट्‌टी के हैं और खेतों से जिनका धान घर पहुंच चुका है, उनके धान में नमी ज्यादा आने की संभावना ज्यादा है। किसानों का कहना है कि मौसम की मार को देखते हुए शासन को धान में नमी का प्रतिशत भी 17 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी तक करना चाहिए नहीं तो उनका काफी नुकसान हो जाएगा।

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