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BJP Tiranga Yatra: ऑपरेशन सिंदूर पर अब राजनीतिक युद्ध, कांग्रेस ने उठाए सवाल तो भाजपा ने संभाला मोर्चा

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब आतंकियों और उनके संरक्षक पाकिस्तान पर आपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय सेनाओं ने प्रहार किया तो समस्त देशवासियों सहित सभी राजनीतिक दल सरकार के साथ खड़े नजर आए।

मगर, सीजफायर की घोषणा के साथ ही राजनीतिक युद्ध शुरू हो गया। कश्मीर मामले सहित सीजफायर में अमेरिका के कथित हस्तक्षेप को हथियार बनाकर विपक्ष सत्ता पक्ष को सैन्य अभियान में विजय के श्रेय से दूर करना चाहता है तो कांग्रेस की सक्रियता बढ़ती देख भाजपा ने भी मोर्चा संभाल लिया है।

माना जा रहा है कि भगवा खेमे ने देशभर में मंगलवार को दस दिवसीय तिरंगा यात्रा की शुरुआत इसी रणनीति के साथ की है कि सैन्य पराक्रम के गौरवगान के साथ उठने वाले राष्ट्रप्रेम के जनज्वार में विपक्षी नैरेटिव कदम ही न जमा सके।

ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय बेशक सेनाओं के पराक्रम को गया, लेकिन ठोस निर्णय और मजबूत नेतृत्व के लिए सरकार को भी सराहना मिलना स्वाभाविक है। इंटरनेट मीडिया पर यह दिखाई भी दिया। आतंकी अड्डों को ध्वस्त करने के बाद सीजफायर की घोषणा कर दी गई।

विपक्ष ने उठाए सवाल

सरकार की ओर से दावा किया गया कि इसके लिए पाकिस्तान ने गुहार लगाई, जबकि विपक्ष ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सरकार से पहले युद्ध विराम की सूचना एक्स के जरिए कैसे दे दी? क्या अमेरिका की मध्यस्थता से भारत ने निर्णय लिया? कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी दखल को लेकर भी संदेह जताया।

इधर, जनता के बीच यह भाव देखने को मिला कि पाकिस्तान को और सबक सिखाना चाहिए था।युद्ध की परिस्थितियों तक सरकार के साथ खड़े होने का दावा कर रहा विपक्ष सीजफायर के तुरंत बाद ही सरकार पर हमलावर हो गया। प्रयास यही कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय भाजपाई खेमे को न मिल सके।

मगर, सोमवार को देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आतंक और पाकिस्तान के विरुद्ध सख्त रुख दिखाते हुए कार्रवाई सिर्फ स्थगित किए जाने की घोषणा की। कड़े शब्दों को पाकिस्तान को चेताया तो माहौल अचानक फिर बदलने लगा। पीएम से कवर फायर मिलते ही भाजपा भी मैदान में कूद गई। मंगलवार से ही देशभर में तिरंगा यात्रा शुरू कर दी गई, जो कि 23 मई तक चलना प्रस्तावित है।

पार्टी के नेताओं को सामने आने से परहेज

सूत्रों के अनुसार, संगठन की जिला और शहर इकाइयों से कहा गया है कि पार्टी के प्रमुख नेता सामने आने से परहेज करें, बल्कि पूर्व सैनिकों, समाज के प्रबुद्धजन आदि को आगे रखकर सेना के शौर्य को सलाम करते हुए ऑपरेशन सिंदूर की उपलब्धि को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें। उद्देश्य स्पष्ट है कि भाजपा सीधे तौर पर इस सैन्य सफलता का राजनीतिकरण न करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को मोदी सरकार की सफलता के रूप में प्रचारित-प्रसारित कर विपक्षी नैरेटिव को ढेर करना चाहती है।

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