छत्तीसगढ़

पति-बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ रही पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Chhattisgarh High Court ने कहा—यदि पत्नी बिना कारण घर छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ रहती है तो वह Section 125(4) CrPC के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं।


Bilaspur News: छत्तीसगढ़ के Chhattisgarh High Court ने भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha की सिंगल बेंच ने कहा है कि यदि पत्नी बिना ठोस कारण के पति और बच्चों को छोड़कर चली जाती है और किसी अन्य पुरुष के साथ रहती है, तो वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होती।

अदालत ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी।

पत्नी ने मांगा था 1 लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता

मामला Bhilai की एक महिला से जुड़ा है, जिसने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण के लिए आवेदन दिया था। महिला का कहना था कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी और पति की सहमति से कोचिंग के लिए Delhi गई थी।

उसने कोर्ट में दावा किया कि उसके पति की मासिक आय करीब 3 लाख रुपये है, इसलिए उसे हर महीने 1 लाख रुपये गुजारा भत्ता दिया जाए।

पति ने लगाए गंभीर आरोप

पति ने कोर्ट में महिला के दावों को खारिज करते हुए बताया कि 11 नवंबर 2022 को पत्नी बिना बताए घर छोड़कर चली गई थी। वह जाते समय गहने और जरूरी दस्तावेज ले गई, जबकि अपने दो छोटे बच्चों को घर पर ही छोड़ दिया

पति ने पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। बाद में पता चला कि वह एक व्यक्ति और अपनी बहन के साथ फ्लाइट से दिल्ली गई थी और वहां करीब 10–11 दिन तक रुकी रही

फैमिली कोर्ट ने भी खारिज की थी अर्जी

इस मामले की सुनवाई Family Court Durg में हुई थी, जहां सबूतों के आधार पर महिला की भरण-पोषण की अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद महिला ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

फैसला सुनाते हुए Chhattisgarh High Court ने कहा कि महिला ने बिना पर्याप्त कारण के पति का घर और बच्चों को छोड़ दिया। साथ ही किसी अन्य पुरुष के साथ कई दिनों तक बाहर रहना और परिवार को इसकी सूचना न देना स्वैच्छिक परित्याग (Voluntary Desertion) की श्रेणी में आता है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में Section 125(4) CrPC के तहत पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं रहती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी

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