छत्तीसगढ़

खेत और आंगनबाड़ी हादसे में बच्चों की मौत, हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को दिए मुआवजे के आदेश

6 साल और 2.5 साल के बच्चों की करंट से हुई मौत, कोर्ट ने रोकथाम के लिए राज्य को कड़े निर्देश दिए।


बिलासपुर। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही और कोंडागांव जिले में खेत और आंगनबाड़ी में करंट लगने से दो बच्चों की मौत के मामलों में हाईकोर्ट ने मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। बिजली विभाग ने पहले ही एक बच्चे के परिजनों को 4 लाख और दूसरे बच्चे के परिजनों को 1 लाख रुपए मुआवजा दिया।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए अवकाश के दिन सुनवाई कर राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल कर्मचारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना और नीति बनाना आवश्यक है।

पहली घटना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के करगीकला गांव की है, जहां 6 साल के बच्चे की खेत के पास खेलते हुए करंट लगने से मौत हो गई। दूसरी घटना कोंडागांव जिले की है, जहां आंगनबाड़ी में ढाई साल की बच्ची महेश्वरी यादव करंट की चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में खेतों में बाड़ पर करंट लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे न केवल इंसानों बल्कि पशु और वन्यजीवों की भी जान खतरे में पड़ रही है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है, क्योंकि पानी भरने से पूरा इलाका करंट की चपेट में आ सकता है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं, और बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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