दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी रणनीति बैठक! बंद कमरे में हुआ मंथन, भूपेश बोले- अब हर मोर्चे पर होगी लड़ाई
इंदिरा भवन में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी में अहम बैठक; महंगाई, बेरोजगारी और लोकतंत्र के मुद्दों पर गरजा विपक्ष

रायपुर/नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में गुरुवार को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi, संगठन महासचिव K. C. Venugopal और कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi Vadra की मौजूदगी में देशभर के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों, प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यापक मंथन किया गया।
बैठक में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने कहा कि देश इस समय महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक, घोटालों और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष कर रही है और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करती रहेगी।
भूपेश बघेल ने विशेष रूप से युवाओं और छात्रों के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा साथी अपने अधिकारों की लड़ाई पूरे दमखम के साथ लड़ रहे हैं और पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
बैठक के दौरान राज्यसभा चुनाव से जुड़े मुद्दे भी जोरदार तरीके से उठे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेत्री Meenakshi Natarajan का राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन रद्द किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस की ओर से इसे असंवैधानिक कदम बताते हुए भाजपा और चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और हालिया घटनाक्रम ने उनकी चिंताओं को और मजबूत किया है। पार्टी का दावा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि इस फैसले को लोकतांत्रिक और संवैधानिक मंचों पर चुनौती दी जाएगी तथा न्याय के लिए उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्पों का उपयोग किया जाएगा।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार के 12 साल पूरे होने के जश्न पर भी निशाना साधा। नेताओं का कहना था कि सरकार अपनी उपलब्धियों का जश्न मना रही है, लेकिन दूसरी ओर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर किए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
दिल्ली में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक को आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर देशभर में अपने अभियान को और तेज कर सकती है।


