छत्तीसगढ़

डेढ़ साल से गायब था सरकारी कर्मचारी! अब विभाग ने आखिरी मौका देकर जारी किया नोटिस, नहीं लौटे तो होगी बड़ी कार्रवाई

मुंगेली: सरकारी नौकरी में लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने वाले कर्मचारी पर अब विभाग ने सख्ती दिखाई है। मुंगेली में पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग ने करीब डेढ़ साल से कार्यस्थल से अनुपस्थित चल रहे परिचारक सतीश कुमार यादव को कार्य पर उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।

सतीश कुमार यादव की पदस्थापना पशु औषधालय कंतेली में है। विभाग के मुताबिक, वह 30 जुलाई 2024 से बिना किसी सूचना के लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित हैं। विभाग की ओर से पहले भी कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कार्यस्थल पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी नहीं संभाली।

कई बार पत्र भेजे, फिर भी नहीं लौटे कर्मचारी

उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आर.एम. त्रिपाठी के मुताबिक, कर्मचारी को कार्य पर वापस बुलाने के लिए विभाग की ओर से पहले भी कई प्रयास किए गए थे। इसके बावजूद सतीश कुमार यादव ने न तो कार्यभार ग्रहण किया और न ही अनुपस्थिति को लेकर कोई उचित सूचना दी।

विभाग ने लगातार अनुपस्थित रहने को शासकीय सेवा के प्रति रुचि और लगन के अभाव के रूप में माना है। साथ ही इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत बताया गया है।

अब मिला सिर्फ 3 दिन का समय

विभाग की ओर से जारी सूचना में सतीश कुमार यादव को नोटिस प्रकाशित होने के तीन दिनों के भीतर कार्यस्थल पर उपस्थित होकर अपना कर्तव्य संभालने का निर्देश दिया गया है।

यानी अब कर्मचारी के पास ड्यूटी पर लौटने के लिए महज तीन दिन का समय है।

नहीं लौटे तो क्या होगा?

विभाग ने नोटिस में साफ चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में अगर कर्मचारी कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं तो उनकी अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि को नियमानुसार सेवा में व्यवधान माना जाएगा।

साथ ही इस अवधि के लिए अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, निर्देशों का पालन नहीं करने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

अब विभाग की अगली कार्रवाई पर नजर

डेढ़ साल से अधिक समय से ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारी को विभाग ने फिलहाल कार्य पर लौटने का अंतिम मौका दिया है। अब देखना होगा कि सतीश कुमार यादव तीन दिन के भीतर ड्यूटी पर वापस लौटते हैं या फिर विभाग उनके खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करता है।

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