गरियाबंद. छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग तहसील में ग्रामीण फ्लोराईड युक्त पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं. 5 साल के बच्चे से लेकर 55 साल के बुजुर्गों पर फ्लोराई युक्त पानी का असर देखने को मिल रहा है. लेकिन प्रशासन ने अब तक समस्या का स्थाई हल नहीं किया है. वहीं स्वास्थ्य विभाग भी इससे बेखबर है.
बता दें, देवभोग तहसील के 40 गांव में आज से 7 साल पहले ही फ्लोराइड की पुष्टि हो गई थी. लेकिन अब तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया. देवभोग के अंतर्गत नांगलदेही गांव के हर घर में लोग हड्डियों की बीमारी से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों का दावा है कि 700 लोगों की आबादी वाले गांव में 300 से ज्यादा लोगों पर फ्लोराइड का असर है. वहीं 60 से ज्यादा लोगों के हड्डियों में समस्या आ गई है.
सबसे अधिक फ्लोराइड प्रभावित गांव है नांगलदेही
फ्लोराइड प्रभावित गांव में सबसे उपर नाम नांगलदेही का आता है. तीन साल पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक यहां के सोर्स में मिनिमम 6 पीपीएम से ले कर अधिकतम 14 पीपीम तक फ्लोराइड होने की पुष्टि हुई है. जबकि सामान्य सोर्स में 1.5 पीपीएम से कम तक मानव शरीर के लिए ठीक माना गया है.
पीने के पानी का दूसरा कोई विकल्प नहीं
फ्लोराईड से पीड़ित मधुसूदन नागेश पिछले 6 सालों से कमर टेढ़ा होने की बिमारी झेल रहे हैं. उन्होंने बताया कि बढ़े हुए फ्लोराइड की जानकारी सबको है, पर विकल्प का किसी ने इंतजाम नही किया. कुंए के पानी में भी फ्लोराइड की 6 पीपीएम की मात्रा है.
200 बच्चों और 300 वयस्कों में फ्लोराईड का असर
नागेश ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं तीनो के दांत पीले हैं. पूरे गांव में 200 से ज्यादा युवा बच्चे दांत पीले होने के शिकार हो चुके हैं. इसके अलावा गांव में 100 से ज्यादा वयस्क ऐसे हैं जिन्हे हड्डी संबंधी विकार का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का दावा है कि 700 की आबादी वाले इस गांव में 300 से ज्यादा ग्रामीणों पर फ्लोराइड का असर स्पष्ट नजर आ रहा है. जांच की गई तो और भी बातें सामने आएगी.