जानिए इस बार की एकादशी क्यों है खास, क्या है इसका महात्म्य और व्रत कथा

मान्यता है कि एकादशी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु के आशीर्वाद से तन-मन-धन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार महीने में दो एकादशी- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है…
परम एकादशी : सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है, यूं तो प्रत्येक महीने दो बार एकादशी तिथि पड़ती हैं, शुक्ल पक्ष की एकादशी और कृष्ण पक्ष की एकादशी. इस प्रकार पूरे वर्ष में कुल 24 बार एकादशी के व्रत रखे जाते हैं, किंतु जिस वर्ष अधिक मास पड़ता है उस वर्ष दो अतिरिक्त एकादशी भी आती है तो कुल 26 एकादशी होती हैं. संयोग 3 साल बाद इस वर्ष भी अधिक मास पड़ रहा है जिस कारण इस वर्ष कुल 26 एकादशी हो जाएंगी.
अधिक मास की एकादशी को पद्मिनी और कृष्ण पक्ष की परम एकादशी कहा जाता है. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के निमित्त रखा जाता है और अधिक मास भी भगवान विष्णु को अति प्रिय है इन कारणों से परम एकादशी का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. इस वर्ष परम एकादशी का व्रत 12 अगस्त 2023 को रखा जाएगा. परम एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत कथा भी पढ़ी जाती है. तो आईए जानते हैं परम एकादशी की व्रत कथा…
परम एकादशीपरम एकादशी व्रत कथा : पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में काम्पिल्य नाम का एक नगर था. काम्पिल्य नगर में सुमेध (सुमेधा) नाम का ब्राह्मण और उसकी पतिव्रता पत्नी पवित्रा रहती थी. दोनों पति-पत्नी अपने सांसारिक जीवन से खुश नहीं थे उनका जीवन दरिद्रतापूर्वक बीत रहा था. अपनी दरिद्रता से तंग आकर ब्राह्मण सुमेध ने अपनी पत्नी से कहा कि वह परदेश जाकर कुछ काम करना चाहता है क्योंकि घर पर बेरोजगार बैठने से अच्छा है कि कुछ काम किया जाए.
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इस पर उसकी पत्नी ने कहा- हे स्वामी, मैं आपकी दासी हूं, पत्नी को वही करना चाहिए जो उसका पति कहे, किंतु धन और संतान पिछले जन्मों के कर्मों के आधार पर ही मिलते हैं. यदि हमारे भाग्य में धन लिखा होगा तो हमें अवश्य प्राप्त होगा. मैं आपके बिना नहीं रह सकती इसलिए आप कहीं ना जाएं यही पर रहें, इस प्रकार धीरे-धीरे समय बितता गया. एक दिन ब्राह्मण दंपति के भाग्यवस महर्षि कौण्डिन्य उसके यहां पधारे. दोनों पति-पत्नी ने उनकी खूब सेवा की.आदर-सत्कार और और खूब सेवा की. परम एकादशी का शुभ-मुहूर्त…
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 अगस्त 2023 शुक्रवार सुबह 05:06 बजे.
- एकादशी तिथि समाप्त: 12 अगस्त 2023 शनिवार सुबह 06:31 बजे.
- परम एकादशी व्रत 12 अगस्त 2023 को है.
ब्राह्मणी ने महर्षि से आग्रह किया कि वो उनकी निर्धनता दूर करने का उपाय बताएं, तब कौण्डिन्य ऋषि ने उन्हें कृष्ण पक्ष की परम एकादशी का व्रत करने को कहा. उन्होंने कहा स्वयं कुबेर ने यह व्रत किया है जिससे भगवान भोलेनाथ ने उन्हें धनाध्यक्ष बना दिया. इस व्रत को राजा हरिश्चंद्र ने भी किया जिससे उन्हें पुत्र-पत्नी और राज्य की पुनः प्राप्ति हुई. इस प्रकार ब्राह्मण दंपति ने ऋषि कौंडिण्य के बताए अनुसार परम एकादशी का व्रत किया तथा रात्रि जागरण करते हुए भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जिसके फलस्वरूप उन्हें धन-धान्य की प्राप्ति हुई और उनकी गरीबी दूर गई.


