छत्तीसगढ़

“क्लासरूम से ग्लोबल स्टेज तक!” — एआई शिक्षा पर संसद में बड़ी चर्चा, बृजमोहन बोले: अब भारत के युवाओं की बारी

रायपुर/नई दिल्ली। क्या अब भारतीय क्लासरूम सीधे ग्लोबल मंच से जुड़ने वाले हैं? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर संसद में हुई एक अहम बैठक ने शिक्षा के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता Brijmohan Agrawal ने नई दिल्ली में आयोजित “शिक्षा में एआई का परिचय” विषय पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक में हिस्सा लिया और एआई आधारित शिक्षा को समय की जरूरत बताया।


🧠 “एआई से बदलेगा पढ़ाई का तरीका”

बैठक में अग्रवाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल शिक्षण पद्धतियों को आधुनिक बनाएगा, बल्कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक का समावेश भारतीय शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों के बीच अवसरों की खाई कम हो सके।


🌍 कोलंबिया यूनिवर्सिटी से प्रस्तुति

बैठक के दौरान Columbia University, अमेरिका के वाइस डीन डॉ. विशाल मिश्रा ने एआई के बढ़ते प्रभाव और इसके व्यावहारिक उपयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

उन्होंने बताया कि एआई किस प्रकार:

  • व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized Learning)

  • मूल्यांकन प्रणाली

  • शिक्षकों की सहायता
    में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


📊 ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम

अग्रवाल ने कहा कि भारत जैसे युवा देश के लिए एआई आधारित शिक्षा नवाचार का सशक्त माध्यम बन सकती है, बशर्ते इसे समावेशी, नैतिक और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण से लागू किया जाए।

उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में और मजबूत बनाएगी।


🔎 बड़ा सवाल

क्या एआई भारतीय शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदल देगा?
और क्या देश के हर कोने तक यह तकनीक समान रूप से पहुंच पाएगी?

संसदीय समिति की इस चर्चा के बाद साफ है कि आने वाले समय में एआई शिक्षा नीति का अहम हिस्सा बन सकता है — और भारतीय युवाओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकता है।

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