Maha Kumbh 2025: संगम में पवित्र स्नान का जुनून, घुटने हो गए जाम, सांस लेना हुआ दूभर
Maha Kumbh 2025: पैदल चलना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. लेकिन, सभी लोग प्रतिदिन वॉकिंग नहीं करते हैं. ऐसे में आदत नही होने पर मकर संक्रांति का स्नान करने महाकुंभ मेले में लोग पहुंचे तो उनके घुटने जाम हो गए और सांस लेना मुश्किल हो गया.
संगम स्नान करने के लिए उन्हे दस से पंद्रह किमी पैदल चलना पड़ा. यह उनके लिए अच्छा एक्सपीरियंस नही रहा. सबसे ज्यादा परेशानी संगम स्नान के बाद घर लौटने पर हुई. किसी को नेहरू पार्क पहुंचने में पसीने छूटे तो कोई जंक्शन की राह तलाशता नजर आया.
सबसे कठिन रहा जंक्शन पहुंचना
श्रद्धालुओं के लिए सबसे अधिक कठिन जंक्शन के सिटी साइड पहुंचना रहा. ई रिक्शा और टैंपो वाले उन्हें जंक्शन के सिविल लाइंस साइड की ओर छोड़ रहे थे और इसके बाद उन्हे वापस कर दिया जा रहा था. उनको पता ही नही था कि किधर जाना है. यहां से उन्हें पैदल रेलवे पुल पैदल होकर जंक्शन जाना पड़ रहा था. पहले केपी कॉलेज, हिंदू हास्टल चौराहा और नखास कोहना से संगम तक पांच से छह किमी पैदल चलना और फिर इतना ही वापस पैदल आना. इसके बाद जंक्शन सिविल लाइंस साइड से जंक्शन के सिटी साइड पैदल जाने में उनको दस से पंद्रह किमी चलना पड़ा. इससे उनकी हालत खराब हो गई. इतना ही नही, डीएसए ग्राउंड चौराहे को ब्लाक कर श्रद्धालुओं को खुसरो बाग के भीतर से निकाला गया.
नेहरू पार्क के लिए नही सवारी
दोपहर दो बजे तक संगम से स्नान करके आने वालों को हिंदू हास्टल चौराहे पर शटल बसे मिलती रही जो उन्हें नेहरू पार्क की पार्किंंग तक पहुंचा रही थीं. इसके बाद यहां पर भी बसों का आना बंद हो गया. इसके बाद श्रद्धालुओं को काफी पैदल चलना पडा. ई रिक्शा और आटो की मनमानी के चलते तमाम श्रद्धालु पैदल ही नेहरू पार्क के लिए निकल पड़े. सवारी नही मिलने से उनकी परेशानी लगातार बढ़ती रही.
नही पसीजे तो जमकर कोसा
जो स्नान कर वापस लौट रहे थे वह जगह जगह बैरीकेडिंग से निकलने की दुहाई दे रहे थे लेकिन उनकी कोई सुनवाई नही हुई. ई रिक्शा और आटो को भी नही जाने दिया जा रहा था. बाइक और स्कूटी को भी जाने की अनुमति नही थी. लोगों का दम तब जवाब दे गया जब पानी की टंकी पर बने नए आरओबी को बंद कर दिया और पुराने पुल से पैदल जाने दिया गया. इसके बाद डीएसए ग्राउंड चौराहे पर फिर से बैरीकेडिंग कर श्रद्धालुओं को खुसरो बाग के छोटे वाले गेट से गुजारा गया. ऐसे में छोटे बच्चे और बुजुर्ग हाथ जोड़कर जाने की प्रार्थना कर रहे थे लेकिन सुनवाई नही होने से वह पुलिस और प्रशासन को कोसते नजर आए.
हमे खुद नही पता रास्ता
मेले में यूपी के तमाम शहरों से पुलिस फोर्स को बुलाया गया है लेकिन शहर के रास्तों की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग नही दिए जाने से वह भी बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का सही रास्ता बनाने में असफल रहे. यही कारण रहा कि श्रद्धालु सही जगह पहुंचने के बजाय भटकते रहे. कभी वह सिविल लाइंस चौराहे पहुंचते तो कभी जंक्शन सिटी साइड पर फंसे नजर आए. यहां तक कि सही रास्ता नही पता होने पर दूसरे शहरों से आए श्रद्धालु नखास कोहना, घंटाघर से लेकर कटरा की गलियों में भी चलते फिरते नजर आए.
आदत नही तो होगी परेशानी
अगर किसी को रोजाना चार से पांच किमी चलने की आदत है तो कोई बात नही. लेकिन जो लोग मंगलवार को मकर संक्रंाति पर दस से पंद्रह किमी चलने पर मजबूर हुए उनको आने वाले 24 से 48 घंटे तक घुटने के दर्द से जूझना होगा. अध्ािक चलने से बॉडी में लैक्टिक एसिड इम्बैलेंस से उनके घुटने जाम हो सकते हैं. ऐसे में वापस नार्मल होने के लिए बॉडी को 48 घंटे रिलैक्स की जरूरत होगी. इसके अलावा लोगों को इतना चलने पर सांस फूलने की शिकायत भी हुई. हार्ट और लंग्स के मरीजों को सामान्य लोगों की अपेक्षा अधिक रिलैक्स करना पड़ सकता है.
मेरा परिवार मुझसे बिछड़ गया है. तीन बड़े बड़े झोले हैं और अब मुझसे चला नही जा रहा है. कोई सुन भी नही रहा है. ई रिक्शा वाले को पुलिस वालों ने जाने नही दिया. मेरे पास फोन भी नही है. किसी तरह जंक्शन पहुंचा दीजिए, वही परिवार वाले मिलेंगे.
देवकी गौतम, मथुरा
तमिलनाडु से आया हूं. शाम को चेन्नई की ट्रेन है. जंक्शन पहुंचने का रास्ता नही पता. पुलिस वाले भी नही बता पा रहे हैं. काफी देर से भटक रहा हूं. सिविल लाइंस साइड से गया था तो अंदर नही जाने दिया. बोले सिटी साइड जाओ. वहां का रास्ता नही पता. अब पैदल भी नही चला जा रहा है.
मदन कुमार, कोयम्बटूर
पहले कई किमी चलकर स्नान करने गए और फिर वहां से परिवार को लेकर पैदल आ रहे हैं. काफी थक गए हैं. ई रिक्शा वाले ने पांच सौ रुपए लेकर बीच रास्ते में छोड़ दिया. पता नही चल रहा किधर जाना है. हर रास्ते से दूसरी तरफ मोड़ दिया जा रहा है. मेरे आए बच्चे और बुजुर्ग पैदल चलने से मना कर रहे हैं. मेरी ट्रेन भी छूट गई है.
सौरभ तिवारी, देवरिया
स्थानीय प्रशासन को थोड़ा सा और एक्सरसाइज करना चाहिए था. श्रद्धालुओं को कितना कम पैदल चलना पड़े इसका ध्यान रखें. किसी को सही रास्ता नही पता. पुलिस के लोग ठीक से बात नही कर रहे हैं. इतना बड़ा आयोजन है तो इस पार्ट पर ध्यान देना जरूरी है. रोड खाली दिख रही है तो साधन चलाने में क्या दिक्कत है.
मधुसूदन, बंग्लुरु
जिन लोगों को अधिक पैदल चलने की आदत नही है उनके लिए दस से पंद्रह किमी चलना आसान नही है. उनका घुटना जाम होगा और सांस लेने में मुश्किल हो सकती है. बेहतर होगा कि थोड़ी थोड़ी देर रेस्ट करते रहें. बुजुर्ग और महिलाओं को आराम से चलना होगा.
डॉ. डीके मिश्रा, फिजीशियन
ये तो बॉडी स्टेमिना पर निर्भर करता है. अधिक चलने से कोई बहुत दिक्कत नही होती है. बस बॉडी को बाद में रिलैक्स देना होता है. जो लोग लंग्स और हार्ट के मरीज हैं या जिनको आर्थराइटिस की शिकायत है उन्हें इतना पैदल चलने से बचना होगा. बीपी के मरीजों को भी इसका ध्यान रखना होगा.


