ट्रेन में आग लग जाए या बड़ा हादसा हो जाए तो कितना पैसा देती है रेलवे? ज्यादातर यात्रियों को नहीं पता ये नियम
दरभंगा स्पेशल और राजधानी एक्सप्रेस में आग के बाद बढ़ी दहशत, अब हर यात्री पूछ रहा — हादसे के बाद मिलेगा कितना मुआवजा?

ट्रेन में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के मन में एक सवाल हमेशा रहता है — अगर यात्रा के दौरान बड़ा हादसा हो जाए, ट्रेन में आग लग जाए या जान-माल का नुकसान हो जाए, तो आखिर रेलवे कितना मुआवजा देती है? हाल ही में दो बड़े रेल हादसों ने इस सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है।
पहला मामला नई दिल्ली से बिहार जा रही दरभंगा क्लोन स्पेशल ट्रेन का है, जहां अचानक भीषण आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। छठ पर्व के कारण ट्रेन में भारी भीड़ थी और आग लगते ही लोगों में चीख-पुकार शुरू हो गई। वहीं दूसरी तरफ तिरुवनंतपुरम से दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में भी अचानक आग लगने की घटना सामने आई, जिसके बाद यात्रियों में दहशत फैल गई।
ऐसे हादसों के बाद लोग सबसे पहले यही जानना चाहते हैं कि अगर किसी यात्री की जान चली जाए, कोई गंभीर रूप से घायल हो जाए या स्थायी विकलांगता हो जाए, तो रेलवे की तरफ से कितना मुआवजा मिलता है।
दरअसल, रेलवे यात्रियों को ट्रैवल इंश्योरेंस की सुविधा देता है, लेकिन इसका फायदा हर किसी को नहीं मिलता। यह सुविधा केवल कन्फर्म, आरएसी और पार्ट कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए होती है। टिकट बुक करते समय यात्रियों को सिर्फ लगभग 35 पैसे अतिरिक्त देकर यह इंश्योरेंस लेना होता है, लेकिन ज्यादातर लोग जल्दबाजी में इस विकल्प को नजरअंदाज कर देते हैं।
इंश्योरेंस लेने के बाद कंपनी की तरफ से यात्री को SMS और ईमेल भेजा जाता है। इसके बाद यात्री को इंश्योरेंस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर नॉमिनी की जानकारी भरनी होती है। अगर नॉमिनी की डिटेल नहीं दी गई हो, तो हादसे की स्थिति में मुआवजा कानूनी वारिस को दिया जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल — आखिर मिलता कितना पैसा है?
रेलवे ट्रैवल इंश्योरेंस के तहत ट्रेन हादसे में मौत होने पर यात्री के परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है। अगर किसी यात्री को स्थायी पूर्ण विकलांगता यानी Permanent Total Disability हो जाती है, तब भी 10 लाख रुपये तक की राशि मिल सकती है।
वहीं अगर हादसे में किसी यात्री को स्थायी आंशिक विकलांगता होती है, तो उसे 7.5 लाख रुपये तक का क्लेम मिल सकता है। इसके अलावा घायल यात्रियों के इलाज के लिए 2 लाख रुपये तक अस्पताल खर्च और 10 हजार रुपये तक ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी दिया जाता है।
हालांकि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में यात्री टिकट बुक करते समय ट्रैवल इंश्योरेंस का विकल्प ही नहीं चुनते। ऐसे में हादसे की स्थिति में उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता।
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ रहे ट्रेन हादसों और आग की घटनाओं को देखते हुए यात्रियों को टिकट बुकिंग के समय इस छोटे से विकल्प को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि कई बार सिर्फ 35 पैसे का यह फैसला मुश्किल वक्त में परिवार के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है।



