छत्तीसगढ़

 रायपुर:अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मी आंदोलन की राह पर, 22 और 23 जुलाई को करेंगे हड़ताल…

 रायपुर। मुख्यमंत्री से लेकर बड़े नेताओं को ज्ञापन देने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से व्यथित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के संविदा कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे हैं. 22 और 23 जुलाई को इन संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ने के आसार हैं.

छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ अमित कुमार मिरी ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के संविदा कर्मचारियों द्वारा अपनी माँगों को लेकर मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री सहित तमाम सांसदों और विधायकों से मिल कर ज्ञापन दिया गया था. लेकिन कोई सुनवाई नहीं होने पर विवश होकर ध्यानाकर्षण के लिए 22 और 23 जुलाई को रायपुर में हड़ताल करने का निर्णय लिया है.

इन सेवाओं पर पड़ेगा असर

एनएचएम और एड्स नियंत्रण मिशन से लगभग 16 हज़ार से ज्यादा डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल व प्रबंधकीय संवर्ग के कर्मचारी जुड़े हुए हैं. हड़ताल की वजह से इनके काम पर नहीं रहने से मरीजों के परीक्षण, जांच, दवाई, जन्म-मृत्यु पंजीयन, पोषण पुनर्वास, टीकाकरण सहित टीबी, मलेरिया, आयुष्मान कार्ड जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी. इसके अलावा प्रदेश में डायरिया, मलेरिया का प्रकोप चरम पर है, ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं के पटरी से उतरने पर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

आवेदन, निवेदन, ज्ञापन से नहीं बनी बात

छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ अमित कुमार मिरी ने बताया कि काम कर रहे कर्मचारी मानव संसाधन नीति 2018 से शासित होते हैं. समय के साथ नियमों में बदलाव की आवश्यकता है. नियमितिकरण सहित कुल 18 बिंदु मांग तथा गत वर्ष जुलाई में घोषित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री सहित तमाम बड़े मंत्रियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने की वजह से हड़ताल किया जा रहा है, जिसकी सूचना उच्च स्तर पर भी दे दी गई है.

अनुपूरक बजट सत्र घोषणा के बाद पालन नहीं

प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार कार्य कर रहे कर्मचारियों के लिए अनुपूरक बजट सत्र 2023 में 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा सदन में की गई थी, जिसके लिए 350 करोड़ का बजट रखा गया था. कई अन्य विभागों में वह प्राप्त भी हो चुका है, लेकिन आज तक एनएचएम तथा एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला है. अल्प वेतन में काम कर रहे कर्मचारियों को घोषित वेतन वृध्दि का लाभ न देना यह सरकार की नीयत पर संदेह पैदा करता है.

ये है प्रमुख मांगें

18 बिंदु माँगों में नियमितिकरण, लंबित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि, ग्रेड पे निर्धारण, वेतन विसंगति निराकरण, सीआर व्यवस्था में सुधार, चिकित्सा परिचर्या, अवकाश नियम में बदलाव, अनुकंपा नियुक्ति और अनुदान में राशि मे वृद्धि,सेवा पुस्तिका संधारण,तबादला व्यवस्था में नियमितता जैसी प्रमुख मांगें सम्मिलित हैं.

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