दिल्ली के मंच पर छत्तीसगढ़ की वो आवाज गूंजी, जिसने देश-दुनिया में बनाई पहचान… तीजन बाई की याद में सजी पंडवानी

रायपुर: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अपनी खास पहचान दर्ज कराई। दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंडवानी अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। खास बात यह रही कि प्रस्तुति महान पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित रही।
इसी विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा ने दिल्ली के सांस्कृतिक मंच पर अपनी गहरी छाप छोड़ी।
कथा, गायन और अभिनय का दिखा अद्भुत संगम
इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पंडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी।
पंडवानी की खासियत ही इसकी प्रस्तुति शैली है, जिसमें कथावाचन, गायन, संवाद, लय और अभिनय एक साथ देखने को मिलता है। महाभारत की कथाओं को इसी अंदाज में पेश किया गया, जिसने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोक कला की ताकत और व्यापकता से रूबरू कराया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कला और संस्कृति से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव सहित कई लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।
इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं।
तीजन बाई को समर्पित रही खास प्रस्तुति
इस कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक पक्ष रहा तीजन बाई की कला यात्रा को याद करना। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
अपनी विशिष्ट शैली और प्रभावशाली कथावाचन के जरिए उन्होंने पंडवानी को एक नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।
उनकी स्मृति को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन के साथ उस सांस्कृतिक परंपरा को भी याद किया गया, जिसमें कथावाचन सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही स्मृतियों, परंपराओं और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है।
‘लोक कलाओं में सुरक्षित हैं पीढ़ियों की कहानियां’
इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों और पारंपरिक कलाओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
अनुज शर्मा बोले- पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान
धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने पंडवानी को छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला बताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी को गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच पर इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।
अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।
देश की लोक परंपराओं को एक मंच पर लाता है सम्मेलन
आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर देना है।
इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना खास महत्व रखता है।
दिल्ली के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर गूंजी पंडवानी ने एक बार फिर यह साबित किया कि लोक कलाएं सिर्फ अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी भारत की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का जीवंत हिस्सा हैं।
अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में काम कर रहा है।


