छत्तीसगढ़

बस्तर से ऑक्सफोर्ड तक छाया छत्तीसगढ़ का ये शिक्षक, 9500 से ज्यादा शिक्षकों को पीछे छोड़ बना देश का सबसे युवा ‘बेस्ट टीचर’

कोण्डागांव के विनायक कोहली को भूगोल श्रेणी में मिला राष्ट्रीय सम्मान, सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला समेत उनके अनोखे प्रयोगों ने दिलाई देशभर में पहचान

रायपुर/कोण्डागांव, 9 सितंबर 2026। बस्तर की मिट्टी, कला और संस्कृति को शिक्षा से जोड़कर नई मिसाल कायम करने वाले पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोण्डागांव के सामाजिक विज्ञान शिक्षक विनायक कोहली ने देशभर में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। ऑक्सफोर्ड सईद बिजनेस स्कूल और शिव नादर फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘इंडियाज बेस्ट टीचर्स अवार्ड्स 2026’ में उन्हें भूगोल श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ शिक्षक चुना गया है।

इस उपलब्धि के बाद मंगलवार को जिला कार्यालय में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी नूपुर राशि पन्ना ने विनायक कोहली का सम्मान किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, अपर कलेक्टर अजय उरांव समेत जिले के अधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

9500 से ज्यादा शिक्षकों में हुआ चयन

विनायक कोहली ने बताया कि राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए देशभर से 9500 से अधिक शिक्षकों ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी हुई। अंतिम चरण के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया गया, जहां ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और अन्य विशेषज्ञों के सामने उन्होंने अपना प्रस्तुतिकरण दिया।

इसी प्रस्तुतीकरण के आधार पर उन्हें भूगोल श्रेणी में देश का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक चुना गया।

भरतनाट्यम से शुरू किया 30 मिनट का प्रेजेंटेशन

अपने लगभग 30 मिनट के प्रस्तुतिकरण की शुरुआत विनायक कोहली ने भरतनाट्यम की पारंपरिक ‘नमस्कारम’ मुद्रा से की। वह पिछले सात वर्षों से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिक्षक के भीतर अपने विषय से अलग भी कोई कला, कौशल या रुचि होती है। यदि उसे कक्षा शिक्षण से जोड़ दिया जाए तो पढ़ाई ज्यादा प्रभावी, रोचक और जीवंत बन सकती है।

छत्तीसगढ़ की पहली सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला

विनायक कोहली की पहचान केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पहली सामाजिक विज्ञान प्रयोगशाला तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा स्कूल में कई अन्य नवाचारी शिक्षण गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।

इनमें बस्तर आर्ट म्यूजियम कॉर्नर, रोल-प्ले आधारित गतिविधियां, मेडिटेशन सत्र, युवा संसद, मैपिंग गतिविधियां, मृदा नमूना संग्रहण और कला-एकीकृत शिक्षण में भरतनाट्यम का इस्तेमाल शामिल हैं।

इन प्रयोगों के जरिए विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अनुभव और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जा रहा है।

‘बस्तर की संस्कृति ने दिलाई पहचान’

विनायक कोहली ने अपनी सफलता का श्रेय अकेले खुद को देने के बजाय कोण्डागांव की संस्कृति, स्थानीय शिल्पकारों, कलाकारों और विद्यार्थियों को दिया।

उन्होंने कहा कि बस्तर की मिट्टी, यहां की शिल्पकला और स्थानीय परंपराओं को विषय ज्ञान से जोड़कर ही वह इस विषयवस्तु को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जा सके। कोण्डागांव की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना उनके लिए गर्व की बात है।

बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत पर जताई चिंता

प्रस्तुतिकरण के दौरान उन्होंने बच्चों में कम उम्र से ही मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि अत्यधिक डिजिटल निर्भरता बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता और सीखने के तरीके को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सिद्धांतों के अनुरूप हस्त-कौशल आधारित, अनुभवात्मक और खिलौना आधारित गतिविधियों को कक्षा में बढ़ावा देने की अपील की।

‘शिक्षक को सम्मान मिलेगा तभी वह अपना सर्वश्रेष्ठ देगा’

विनायक कोहली ने विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के साथ शिक्षकों के सम्मान और कल्याण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण को केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सेवा के रूप में देखा जाना चाहिए।

उनके अनुसार, शिक्षक को जब समाज में सम्मान और अपने काम पर गर्व का अनुभव होगा, तभी वह कक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए और अधिक प्रेरित होगा।

अब जिले के स्कूलों में बनेंगी भूगोल प्रयोगशालाएं

कार्यक्रम में कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने विनायक कोहली के कार्यों की सराहना की। उन्होंने जिले के सभी विद्यालयों के प्राचार्यों को अपने-अपने स्कूलों में इसी तरह की भूगोल प्रयोगशालाएं स्थापित करने की दिशा में काम शुरू करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही जिले के सामाजिक विज्ञान, भूगोल, इतिहास और कला विषय के शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इस कार्यशाला में विनायक कोहली अपनी शिक्षण पद्धतियों और अनुभवों को दूसरे शिक्षकों के साथ साझा करेंगे।

इस उपलब्धि पर विनायक कोहली ने वन मंत्री केदार कश्यप, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, अधिकारियों, प्राचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय कोण्डागांव के प्राचार्य और केंद्रीय विद्यालय संगठन प्रशासन का भी विशेष धन्यवाद किया।

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