छत्तीसगढ़

सुकमा में कुदरत का कहर! रातभर गूंजती रही तूफान की गर्जना, उखड़ गए पेड़, ठप हुई बिजली व्यवस्था

तोंगपाल से झीरम घाटी तक तबाही के निशान, सीआरपीएफ कैंप को भी भारी नुकसान, युद्धस्तर पर शुरू हुआ राहत कार्य

सुकमा। सुकमा जिले में आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा दी है। देर रात मौसम ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के चलते बिजली व्यवस्था चरमरा गई, जबकि कई स्थानों पर विशाल पेड़ धराशायी हो गए।

सबसे ज्यादा असर तोंगपाल क्षेत्र में देखने को मिला, जहां तूफान की रफ्तार ने कई सरकारी परिसरों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को अपनी चपेट में ले लिया। जानकारी के मुताबिक सीआरपीएफ की 227वीं बटालियन के मुख्यालय को भी भारी नुकसान पहुंचा है। तेज हवाओं के कारण कई बड़े पेड़ उखड़कर भवनों और कार्यालय परिसरों पर गिर पड़े, जिससे सरकारी संपत्तियों को क्षति पहुंची है।

तूफान का असर केवल तोंगपाल तक सीमित नहीं रहा। झीरम घाटी, कोमाकोलेंग और आसपास के कई क्षेत्रों में भी भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ-साथ संचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। हालात को सामान्य करने के लिए राहत और पुनर्स्थापना कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। सीआरपीएफ के जवान, विभागीय कर्मचारी और स्थानीय प्रशासन क्षतिग्रस्त परिसरों की सफाई और व्यवस्था बहाल करने में जुटे हुए हैं।

ग्रामीण इलाकों में भी बिजली और संचार सेवाओं को दोबारा शुरू करने के प्रयास जारी हैं। विभागीय टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं ताकि जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

फिलहाल प्रशासन द्वारा नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर मानसून पूर्व मौसम की चुनौती और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

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